HomeBreaking Newsकोरबा में रेत कारोबार को लेकर फिर तेज हुई सियासत, आरोपों से...

कोरबा में रेत कारोबार को लेकर फिर तेज हुई सियासत, आरोपों से गर्माया माहौल

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  जिले में रेत कारोबार एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भीषण गर्मी के बीच जहां आमजन परेशान हैं, वहीं रेत को लेकर नेताओं के बीच बयानबाजी ने सियासी तापमान भी बढ़ा दिया है। हाल ही में हुई एक प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन पर निशाना साधते हुए ऐसे संकेत दिए, जिनसे यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया है। उनके बयान के बाद कोरबा से लेकर राजधानी तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

- Advertisement -

प्रदेश में सरकार बदले काफी समय बीत चुका है, लेकिन रेत कारोबार को लेकर स्थितियों में खास बदलाव नहीं दिख रहा। सत्ता परिवर्तन के साथ चेहरे जरूर बदलते हैं, मगर व्यवस्थाओं पर सवाल पहले की तरह ही बने रहते हैं। कोरबा में रेत अब सिर्फ निर्माण सामग्री नहीं रह गई है, बल्कि यह सत्ता और प्रभाव का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। यही वजह है कि इस कारोबार को लेकर हर दौर में विवाद और आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रेत से जुड़ा यह मुद्दा नया नहीं है, बल्कि हर सरकार के समय में अलग-अलग रूप में सामने आता रहा है। सत्ता में रहने वाले पक्ष पर लाभ पहुंचाने के आरोप लगते हैं, जबकि विपक्ष इसे जनहित का मुद्दा बनाकर उठाता है। यह सिलसिला वर्षों से जारी है और वर्तमान में भी इसकी तस्वीर कुछ अलग नहीं दिख रही।

कोरबा की जनता के लिए यह परिदृश्य नया नहीं है। समय के साथ किरदार बदलते हैं, लेकिन मुद्दा और बहस का तरीका लगभग वही रहता है। पहले जो आवाजें सीमित दायरे में उठती थीं, अब वे खुलकर सामने आ रही हैं। रेत कारोबार को लेकर उठते सवाल यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या यह कभी सामान्य व्यापार की तरह पारदर्शी हो पाएगा, या फिर हमेशा राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बना रहेगा। फिलहाल जिले में रेत का मुद्दा पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस सिर्फ आरोपों तक सीमित रहती है या फिर किसी ठोस कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ती है।

Must Read