हर साल करोड़ों के कार्य का दावा, लेकिन दो-तीन महीने में ही भर जाते हैं बांध; हसदेव नदी और किसानों के भविष्य पर संकट
छत्तीसगढ़/कोरबा :- राज्य सरकार के अधीन संचालित CSEB के हसदेव ताप विद्युत संयंत्र (HTPP) क्षेत्र अंतर्गत डिंडोलभांटा और झाबू स्थित राखड़ बांधों को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इन बांधों में राख रखने की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है, बावजूद इसके कागजों में हर वर्ष 15 से 30 करोड़ रुपये तक के कार्य दर्शाकर राशि निकाली जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बांधों में वास्तविक रूप से राख खाली कराने या वैज्ञानिक प्रबंधन के बजाय मिट्टी और राख का अस्थायी मेड़ बनाकर जगह बनाई जा रही है। इससे न केवल बांधों की क्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि कागजी कार्यवाही और बोगस बिलों के माध्यम से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की जा रही हैं, जिसके चलते किसी भी राखड़ बांध में दो से तीन महीने से अधिक राख रखने की जगह नहीं बचती। 
एक ही अधिकारियों की वर्षों से पदस्थापना पर सवाल
इस पूरे मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित बांधों में एक ही अधिकारी वर्षों से जमे हुए हैं, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इस स्थिति को लेकर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है।
हसदेव नदी और किसानों के लिए खतरा
राखड़ बांधों की मौजूदा स्थिति को लेकर पर्यावरणीय चिंता भी गहराती जा रही है। यह क्षेत्र हसदेव नदी के आसपास स्थित है, जो कोरबा, चांपा-जांजगीर और सक्ती जैसे जिलों के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राख का रिसाव या प्रदूषण बढ़ता है, तो इससे किसानों की उपजाऊ भूमि प्रभावित हो सकती है। साथ ही, पशुओं के लिए यह पानी हानिकारक साबित हो सकता है। कोरबा नगर निगम द्वारा इसी क्षेत्र से जल लेकर शहर में सप्लाई किया जाता है, ऐसे में भविष्य में इसके दुष्परिणाम गंभीर हो सकते हैं।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आरोप लगाया गया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में शुरू हुई अनियमितताओं को वर्तमान भाजपा सरकार में भी रोका नहीं जा सका है। यह भी उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र लखन लाल देवांगन का गृहक्षेत्र होने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिससे सवाल और भी गहरे हो गए हैं।
संगठन की मांग
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप मिरी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह मामला पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा संकट बन सकता है।











