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NH मुआवजे में हुए भ्रष्टाचार और SDM कार्यालय में पैसा नहीं देने पर बनाए गए मुआवजा 21 लाख से घटाकर 3 लाख बनाए जाने के आरोप पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने जनसंपर्क विभाग द्वारा समाचार प्रकाशित करवा कर दी सफाई, किसान के आरोप को मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण बताया, लेकिन माना किसान के कोर्ट जाने के बाद उसे उसके मुआवजे की राशि मिली 21 लाख, अगर पारदर्शिता तो कोर्ट जाने के बाद क्यों ?

छत्तीसगढ़/कोरबा :- एनएच द्वारा बनाई जा रही उरगा चांपा मार्ग में 23 जून को मुआवजा वितरण में धांधली और बिना मुआवजा के मकान तोड़े जाने की सूचना पर क्षेत्रीय रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ग्राम पताढी पहुंचे जहां लोगों की समस्याओं से रूबरू होते हुए थानों को सूचित कर सड़क पर चक्का जाम कर दिया स्थल पर एक उरगा निवासी फरियादी किसान भी अपनी समस्या को लेकर पहुंचा था जिसने बताया था कि मेरा 21 लाख मुआवजा बना था लेकिन एसडीएम कार्यालय कोरबा में उक्त मुआवजा के एवज में पैसों की मांग की गई पैसा नहीं देने पर मुआवजे की राशि घटाकर 2 लाख 99 हजार कर दी गई जिसके बाद किसान को हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा जहां से उसे 21 लाख रुपए देने के निर्देश दिए गए, इस खबर को सुर्खियां न्यूज़ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसके बाद आज रविवार छुट्टी के दिन संबंधित अधिकारियों के द्वारा जनसंपर्क विभाग के माध्यम से खबर प्रकाशित करवाई गई जिसमें कृषक दुर्गा प्रसाद के आरोपों को मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण बताया गया और पारदर्शिता के साथ मुआवजा वितरण की बात कही जा रही है, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने माना कि किसान को कोर्ट जाने के बाद 21 लाख रुपए दिया गया, अब सवाल उठता है कि किसान को पारदर्शिता के साथ मुआवजा मिलता तो कोर्ट क्यों जाना पड़ता, चलिए मानते हैं कि किसान के आरोप मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण हैं तो क्या एसडीएम कार्यालय मैं पैसों की मांग के आरोप को जिस प्रकार किसान ने गंभीरता के साथ लगाया है उसकी जांच करवाई जाएगी और दोषियों को दंड दिया जाएगा या फिर संबंधित अधिकारियों के अनुसार मिथ्या और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने वाले किसान के ऊपर संबंधित अधिकारी FIR दर्ज करवाएंगे ..????

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कारवाही हो ना हो वैरहाल जिस प्रकार एसडीएम कार्यालय मे घूसखोरी के गंभीर आरोप जनता के द्वारा लगाए जा रहे हैं जिससे जिला प्रशासन कोरबा की साफ-सुथरी छवि को धूमिल किया जा रहा है,  जिस पर दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है ।       

जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी समाचार के अनुसार ग्राम उरगा के कृषक श्री दुर्गा प्रसाद पिता नोटलाल के प्रभावित भूमि ख.नं. 944 / 2ड. अर्जित रकबा 0.101 हे. राशि 20,99,955.00 रू. का अवॉर्ड दिनांक 11.01.2019 को पारित किया गया है। श्री परमेश्वर एवं ग्रामवासी ग्राम उरगा के द्वारा दिनांक 03.10.2020 को कलेक्टर कोरबा को लिखित में शिकायत आवेदन प्रस्तुत कर अवॉर्ड दिनांक 11.01.2019 को शिथिल करते हुए भूमि उपयोगिता एवं एक स्थान की भूमि का एक समान मूल्यांकन कर पुन: नया अवॉर्ड पारित करने जांच की मांग की गई थी। उक्त शिकायत पत्र के संबंध में दल गठन किया जाकर तहसीलदार कोरबा से जांच कराई गई। जिसमें कृषक दुर्गा प्रसाद पिता नोटलाल की भूमि ख. नं. 944 / 2ड. अर्जित रकबा 0.101 हे. भूमि मुख्य मार्ग से बाहर स्थित होना पाया गया। जिसके संबंध में दुर्गा प्रसाद को सुनवाई हेतु नोटिस जारी कर दिनांक 05.12.2020 को आहूत किया गया था। श्री दुर्गा प्रसाद ने उपस्थित होकर बयान दिया गया था। उनके द्वारा माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में रिट याचिका क्रमांक डब्ल्यू पीसी नम्बर. 4978/2021 प्रस्तुत किया गया था। जिसमें माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा दिनांक 08.12.2021 को नियमानुसार कार्यवाही हेतु निर्णय दिया गया है। माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा पारित निर्णय के परिपालन में जांच कराकर श्री दुर्गा पिता नोटलाल को मुआवजा राशि 20,99,955.00 रू. चेक क्रमांक 878000 दिनांक 04.03.2022 को उनके भारतीय स्टेट बैंक शाखा उरगा के खाता क्रमांक 10371899849 में आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान किया गया है। इसी प्रकार भूमि पर स्थित परिसम्पत्ति (मकान) का मुआवजा राशि 93,81,162.00 रू. चेक क्रमांक 252737 दिनांक 14.06.2023 को आरटीजीएस के माध्यम से उनके बैंक खाता में भुगतान किया जा चुका है। श्री दुर्गा प्रसाद के द्वारा यह कहना कि उनके भूमि की राशि 21 लाख की जगह 3 लाख बना दिया गया है, मिथ्या दुर्भावनापूर्ण है। जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित किसानों को मुवावजा प्रदान करने पारदर्शी कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

              जरा देखिए किसान ने क्या आरोप लगाए थे

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