बारीक पेपर के जरिए नशे का नया ट्रेंड, 14 से 20 साल के किशोर सबसे ज्यादा प्रभावित
छत्तीसगढ़/कोरबा :- युवाओं और किशोरों के बीच नशे का एक नया और खतरनाक ट्रेंड तेजी से पैर पसार रहा है, जिसे ‘गोगो’ के नाम से जाना जा रहा है। देखने में साधारण सा कागज लगने वाला यह पेपर अब नशे के सेवन का माध्यम बनता जा रहा है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, यह बेहद पतला और पारदर्शी कागज होता है, जिसमें भांग, चरस, गांजा, अफीम और स्मैक जैसे नशीले पदार्थ भरकर सिगरेट की तरह इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में इसकी कीमत 8 से 15 रुपये तक बताई जा रही है और यह आमतौर पर छिपाकर बेचा जाता है।
किशोर और युवा सबसे ज्यादा प्रभावित
विशेषज्ञों के मुताबिक, 14 से 20 साल के किशोर और युवा इस ट्रेंड के सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं। नशा मुक्ति केंद्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस आयु वर्ग में नशे की लत के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
छिपाकर होती है बिक्री
सूत्रों के अनुसार, यह पेपर खुलेआम नहीं बेचा जाता, बल्कि पान दुकानों और ठेलों पर मांगने पर ही उपलब्ध कराया जाता है। पैकिंग छोटी और साधारण होती है, जिससे इसे आसानी से छिपाया जा सकता है।
कोरबा में भी पहुंचा ‘गोगो’
सूत्रों का दावा है कि यह नशे वाला पेपर अब छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में पहुंच चुका है और कोरबा में भी पान मसाला ठेलों के माध्यम से युवाओं तक आसानी से उपलब्ध हो रहा है। इससे युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
दुकानों की आड़ में बढ़ता नशे का चलन
स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि कुछ दुकान संचालक चाय व ठंडे पेय पदार्थों की आड़ में अपने प्रतिष्ठानों पर युवाओं को बैठाकर नशे का सेवन करने का माहौल उपलब्ध करा रहे हैं। यहां युवा एक-दूसरे को देखकर प्रभावित होते हैं और समूह में पहुंचकर नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
ऐसे स्थानों पर मौजूद माहौल युवाओं को किसी पब जैसी अनुभूति देता है, जिसे वे गलत तरीके से अपनी शान और स्टेटस से जोड़ने लगे हैं। यह प्रवृत्ति सामाजिक रूप से गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
महानगरों की तर्ज पर बदलता माहौल, लड़कियां भी शामिल
कोरबा के कुछ स्थानों पर यह भी देखा गया है कि लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी खुलेआम सिगरेट आदि का सेवन करते नजर आ रही हैं। महानगरों की तर्ज पर तेजी से बदलता यह माहौल आने वाली पीढ़ी के लिए चिंताजनक संकेत दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह सामाजिक रूप से गहरे प्रभाव छोड़ सकती है। वही क्राइम की दर में भी बढ़ोतरी हो सकती है ।
जरूरत सख्त कार्रवाई की
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि पान ठेलों और छोटे विक्रेताओं पर सख्त निगरानी रखते हुए यह पता लगाया जाना जरूरी है कि यह पेपर कहां से आ रहा है। साथ ही, ऐसे चिन्हित स्थानों पर लगातार अभियान चलाकर नशे के सौदागरों के खिलाफ ठोस कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी को इस खतरे से बचाया जा सके।
अपील:
अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध बदलाव को नजरअंदाज न करें। साथ ही, यदि इस प्रकार की किसी भी गतिविधि या बिक्री की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।











