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दीपका की हवा में घुलता जहर: पर्यावरण मंडल की सख्ती के बाद हरकत में SECL

औचक निरीक्षण में खुली प्रदूषण नियंत्रण की पोल, एक माह में सुधार नहीं तो होगी कड़ी कार्रवाई

छत्तीसगढ़/कोरबा (दीपका) :- कोरबा जिले के दीपका क्षेत्र में कोयला खदानों और परिवहन से फैल रहे बेकाबू प्रदूषण को लेकर आखिरकार छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्त रुख अपना लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों, मीडिया में उठ रहे सवालों और आम जनता की नाराजगी के बाद मंगलवार को मंडल की क्षेत्रीय टीम ने दीपका खदान एवं रेलवे साइडिंग का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद SECL प्रबंधन को कड़ी चेतावनी दी गई है।     

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धूल के गुबार में घिरा दीपका, लोगों का सांस लेना हुआ मुश्किल

दीपका क्षेत्र लंबे समय से कोल डस्ट और भारी वाहनों की आवाजाही से प्रभावित है। मुख्य सड़कों पर दिनभर उड़ती धूल अब स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। निरीक्षण के दौरान पर्यावरण मंडल की टीम ने थाना चौक से श्रमिक चौक तक सड़क का जायजा लिया, जहां जगह-जगह धूल की मोटी परत और उड़ते गुबार ने प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी।

टीम ने पाया कि कई स्थानों पर स्प्रिंकलर सिस्टम बंद पड़े हैं, जबकि व्हील वाशिंग सिस्टम भी प्रभावहीन साबित हो रहा है। अधिकारियों ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए SECL प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।     

पानी छिड़काव सिर्फ दिखावा, ठेकेदारी व्यवस्था पर उठे सवाल

निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि सड़कों पर पानी छिड़काव की व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। ठेकेदारी प्रथा के तहत चल रहे डस्ट कंट्रोल सिस्टम को लेकर पर्यावरण मंडल ने स्पष्ट कहा कि केवल खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। प्रभावी और नियमित छिड़काव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

रेलवे साइडिंग में सूखे कोयले की लोडिंग, बढ़ रहा प्रदूषण

चैनपुर-गांधीनगर से सटी दीपका रेलवे साइडिंग में निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर लापरवाही सामने आई। टीम ने पाया कि कोयले को बिना गीला किए सीधे रेलवे वैगनों में लोड किया जा रहा है, जिससे आसपास का पूरा क्षेत्र धूल के गुबार में डूबा रहता है।

पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इस व्यवस्था पर तीखी नाराजगी जताते हुए SECL को एक माह के भीतर स्प्रेगन और आधुनिक स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित करने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने साफ किया कि निर्धारित समयसीमा में सुधार नहीं होने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

“कोहरे की तरह छाया रहता है कोल डस्ट”

निरीक्षण के दौरान मौजूद पर्यावरण विभाग के सांसद प्रतिनिधि शेत मसीह ने कहा कि दीपका क्षेत्र में कोयला परिवहन के कारण हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में कोल डस्ट इस तरह फैला रहता है मानो शहर कोहरे की चादर में ढका हो। यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है और प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनता को अब कार्रवाई का इंतजार

इस कार्रवाई के दौरान क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी, सांसद प्रतिनिधि, SECL दीपका के पर्यावरण एवं सिविल विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पर्यावरण मंडल की यह सख्ती सिर्फ चेतावनी तक सीमित रहती है या वास्तव में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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