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NHAI कोरबा के आश्वासन पर 6 दिन बाद टूटा आमरण अनशन, पूर्व सैनिक कारगिल योद्धा प्रेमचंद पांडे बोले— “कोरबा नहीं, अब दिल्ली में उठेगी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज”

छत्तीसगढ़/कोरबा :- एनएचएआई टोल प्लाजा में कथित भ्रष्टाचार, करोड़ों की ठगी और पूर्व सैनिकों के अधिकारों की अनदेखी के विरोध में आमरण अनशन पर बैठे पूर्व सैनिक व कारगिल योद्धा प्रेमचंद पांडे का अनशन 6वें दिन रविवार को समाप्त कराया गया। यह अनशन परियोजना प्रशासक, एनएचएआई कोरबा श्री डी.डी. परलावर द्वारा कार्यवाही का आश्वासन दिए जाने के बाद समाप्त हुआ।

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प्रेमचंद पांडे का आरोप है कि एनएचएआई टोल संचालक विनोद कुमार जैन द्वारा विभागीय सर्कुलर के विरुद्ध जाकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई है। उन्होंने मांग की थी कि इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराई जाए तथा दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो, उन्होंने यह भी मांग उठाई कि—

  • टोल संचालन का कार्य अरबपतियों को देने की बजाय पूर्व सैनिकों को दिया जाए,

  • सर्कुलर के अनुसार मैनपावर की नियुक्ति हो,

  • स्थानीय लोगों को निर्धारित मानदेय दिलाया जाए,

  • सेवानिवृत्त सैनिकों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित न किया जाए।

रविवार को परियोजना अधिकारी डी.डी. परलावर आमरण अनशन स्थल पर पहुंचे और प्रेमचंद पांडे को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायत को एनएचएआई के केंद्रीय कार्यालय एवं उच्च अधिकारियों को कार्रवाई हेतु प्रेषित किया जाएगा। इसके बाद उन्हें नारियल पानी और जूस पिलाकर आमरण अनशन समाप्त कराया गया। अनशन समाप्त करने के बाद प्रेमचंद पांडे ने तीखा बयान देते हुए कहा—

“मैं 6 दिनों से भूखा-प्यासा भ्रष्टाचार के खिलाफ बैठा था। कोरबा कलेक्टर को भी इसकी जानकारी थी, लेकिन दुख की बात है कि जिला प्रशासन का कोई अधिकारी मेरा हालचाल लेने तक नहीं आया। न ही किसी चिकित्सा अधिकारी ने सुध ली। इससे साफ होता है कि जिला प्रशासन देश के जवानों और पूर्व सैनिकों के प्रति कितना असंवेदनशील है।”उन्होंने आगे कहा कि—

“परियोजना अधिकारी के आश्वासन पर मैं कोरबा में आमरण अनशन समाप्त कर रहा हूं, लेकिन अब यह लड़ाई दिल्ली में लड़ी जाएगी। कोरबा जिला प्रशासन ने यह साबित कर दिया है कि वह हमारी आवाज सुनने के लिए बहरा-गूंगा है।”

अंत में प्रेमचंद पांडे ने मीडिया साथियों, शुभचिंतकों का आभार जताते हुए एनएचएआई कोरबा के परियोजना अधिकारी का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने अवकाश के दिन भी समय निकालकर उनकी बात सुनी और समाधान का आश्वासन दिया।

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