छत्तीसगढ़/कोरबा :- मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास—इन तीनों को एक साथ जोड़कर कोई भी असंभव को संभव बना सकता है। इसका जीवंत उदाहरण हैं कोरबा जिले के पाली विकासखंड के परसदा गांव के रहने वाले सुरेश जगत, जिन्होंने छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहले आदिवासी IAS अधिकारी बनने का गौरव हासिल कर इतिहास रच दिया है।
साल 2018 की UPSC परीक्षा में 556वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने पश्चिम बंगाल कैडर हासिल किया। वर्तमान में सुरेश जगत दार्जिलिंग में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) के पद पर कार्यरत हैं और अपनी सेवा से देश व प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
गाँव के स्कूल से शुरू हुई उम्मीद की उड़ान
सुरेश की प्रारंभिक शिक्षा उनके ही गांव के साधारण प्राथमिक स्कूल से हुई। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए भी उन्होंने कभी बड़े सपने देखने से खुद को पीछे नहीं रखा। 12वीं बोर्ड में वे बिलासपुर की प्रदेश मेरिट लिस्ट में पाँचवें स्थान पर रहे—यहाँ से उनकी प्रतिभा सबके सामने चमकने लगी।
इंजीनियर से एडमिनिस्ट्रेटर तक का सफर
सुरेश ने आगे की पढ़ाई NIT रायपुर से इंजीनियरिंग में की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी योग्यता का अंदाज़ा लगने लगा था। चयन ONGC, NTPC, IES और IRTS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं व संस्थाओं में हुआ, लेकिन उनका दिल प्रशासनिक सेवा में था। बड़े सपने के लिए उन्होंने सभी नौकरियाँ ठुकरा दीं—जो किसी भी युवा के लिए बड़ा साहसिक निर्णय है।
बिना कोचिंग, बिना संसाधन—फिर भी बड़ा मुकाम
UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी सुरेश ने बिना किसी कोचिंग के की। पहले दो प्रयास उन्होंने हिंदी माध्यम से दिए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
हार नहीं मानी—अंग्रेजी माध्यम अपनाया, रणनीति बदली और चौथे प्रयास में लक्ष्य हासिल किया।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
आज सुरेश जगत उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो सामान्य पृष्ठभूमि और सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी ऊँचाई पाई जा सकती है।
छत्तीसगढ़ का गौरव
सुरेश जगत का IAS बनना सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है। गांव से निकलकर देश की प्रशासनिक सेवा तक पहुँचना—यह उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिभा का परिणाम है।
















