आयुर्वेदाचार्य नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताए स्वस्थ रहने के उपाय, तुलसी और अदरक का सेवन बताया हितकारी
वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति होती है कमजोर, संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर मरीजों को विशेष सावधानी की सलाह
छत्तीसगढ़/कोरबा :- हिंदी मासानुसार भाद्रपद (भादो) मास का आरंभ 29 अगस्त 2026 शनिवार से हो चुका है, जो 26 सितंबर 2026 शनिवार तक रहेगा। आयुर्वेद में प्रत्येक मास एवं ऋतु के अनुरूप खान-पान और जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व बताया गया है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने भाद्रपद मास के दौरान आहार-विहार और दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करने की सलाह दी है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा रोगी के रोग को दूर करना है। इसके लिए आयुर्वेद में दिनचर्या, रात्रिचर्या और ऋतुचर्या का विधान किया गया है। भारतीय परंपरा में भी ऋतु के अनुसार आहार-विहार करने की परंपरा रही है। वर्तमान समय में वर्षा ऋतु के दौरान भादो मास होने के कारण वातावरण में नमी और गंदगी बढ़ जाती है। इससे मच्छर, मक्खियां और विभिन्न प्रकार के कीट-पतंग बढ़ने के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार इस समय नमी के कारण वात दोष प्रकुपित होता है और जठराग्नि मंद होने से पाचन शक्ति कमजोर पड़ सकती है। इसके चलते भूख कम लगना, अरुचि, बुखार, मलेरिया, टाइफाइड, जोड़ों का दर्द, गठिया, सूजन, खुजली, फोड़े-फुंसी, दाद, पेट में कीड़े, आंख आना, दस्त सहित कई मौसमी समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है। इस दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना को देखते हुए उच्च रक्तचाप के मरीजों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
स्नेहयुक्त और सुपाच्य भोजन को दें प्राथमिकता
डॉ. शर्मा के अनुसार भादो मास में भोजन ताजा, गर्म, सुपाच्य और स्नेहयुक्त होना चाहिए। माखन, घी, पुराने अनाज जैसे जौ और गेहूं, राई, खिचड़ी, मूंग, लौकी, परवल, तरोई आदि का सेवन किया जा सकता है। भोजन में अदरक, जीरा, मेथी तथा सरसों की कच्ची घानी के तेल का उचित मात्रा में प्रयोग लाभकारी बताया गया है।
उन्होंने इस मास में तुलसी दल और अदरक के सेवन को विशेष रूप से हितकारी बताया। तुलसी को संक्रामक रोगों से बचाव में उपयोगी बताते हुए उन्होंने तुलसी दल और अदरक को पानी में उबालकर गुनगुना सेवन करने की सलाह दी।
कच्चे खाद्य पदार्थों से करें परहेज
वर्षा ऋतु में बीमारी फैलाने वाले कीटाणुओं के तेजी से पनपने की संभावना रहती है। ऐसे में कच्चे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से सलाद और कच्ची सब्जियों को अच्छी तरह धोकर अथवा उबालकर ही उपयोग करने की बात कही गई है।
डॉ. शर्मा ने भादो मास में दही का सेवन नहीं करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे पाचन एवं आंतों से संबंधित परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसके अलावा गुड़, नारियल तेल, मछली, मांस और मदिरा से भी परहेज करने की सलाह दी गई है। छाछ, पत्तेदार सब्जियों और बासी भोजन से भी बचने की बात कही गई है।
दिनचर्या में भी करें आवश्यक बदलाव
भाद्रपद मास में स्वच्छ एवं हल्के वस्त्र पहनने, अत्यधिक नमी और हवा वाले स्थान पर शयन न करने तथा बारिश में भीगने से बचने की सलाह दी गई है। यदि बारिश में भीग जाएं तो तत्काल सूखे कपड़े पहनने चाहिए। नंगे पैर गीली मिट्टी या कीचड़ में जाने से बचना चाहिए और सीलन वाले स्थानों से भी दूरी रखनी चाहिए। बाहर से लौटने के बाद हाथ-पैरों को अच्छी तरह धोकर पोंछना चाहिए।
डॉ. शर्मा ने दिन में सोने, खुले में सोने, रात्रि जागरण, अत्यधिक व्यायाम, धूप में अधिक रहने और अत्यधिक परिश्रम से बचने की सलाह दी है। अज्ञात नदी या जलाशय में स्नान नहीं करने की भी अपील की गई है।
मच्छरों से बचाव के लिए साफ-सफाई जरूरी
वर्षा ऋतु में मच्छरों और कीट-पतंगों की संख्या बढ़ने के कारण मच्छरदानी के उपयोग की सलाह दी गई है। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। आसपास की स्वच्छता संक्रमण से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भादो मास में एक समय भोजन की परंपरा का भी उल्लेख
डॉ. नागेंद्र शर्मा ने स्कंद पुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि भाद्रपद (भादो) मास में दिन में एक ही समय भोजन करने की परंपरा का वर्णन मिलता है और इसे वर्षभर स्वस्थ रहने से जोड़ा गया है। हालांकि भोजन की मात्रा और समय व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य, कार्यशैली और आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के साथ खान-पान और जीवनशैली में आवश्यक परिवर्तन करके तथा सात्विक, ताजा और सुपाच्य आहार-विहार अपनाकर मौसमी बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। भाद्रपद मास में विशेष सावधानी और स्वच्छता के साथ दिनचर्या अपनाने से स्वस्थ रहने में सहायता मिल सकती है।












