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संलग्नीकरण खत्म करने का आदेश बना सवालों के घेरे में CMHO कार्यालय में अब भी जमे बाहरी पदस्थ कर्मचारी, निष्पक्षता पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले के स्वास्थ्य विभाग में संलग्नीकरण समाप्त करने को लेकर जारी आदेश अब खुद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगा है। मार्च 2026 में जारी आदेश में जिलेभर के सभी प्रकार के संलग्नीकरण तत्काल समाप्त करने और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन डेढ़ माह बाद भी कई कर्मचारी और अधिकारी अब तक CMHO कार्यालय में कार्यरत बताए जा रहे हैं।
इस स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भीतर असंतोष और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नियमों का पालन सभी पर समान रूप से नहीं किया गया और कुछ “प्रभावशाली” कर्मचारियों को अब भी विशेष राहत मिली हुई है।       
16 मार्च को जारी हुआ था आदेश
जानकारी के अनुसार CMHO डॉ. सूर्यनारायण केशरी द्वारा 16 मार्च 2026 को आदेश जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिले में सभी प्रकार के संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं। आदेश का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाना बताया गया था।
आदेश जारी होने के बाद कई कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेज भी दिया गया, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि यह कार्रवाई केवल चुनिंदा कर्मचारियों तक सीमित रही।
CMHO कार्यालय में अब भी कार्यरत बताए जा रहे कई कर्मचारी
विभागीय सूत्रों के मुताबिक CMHO कार्यालय में अब भी ऐसे कई कर्मचारी और अधिकारी कार्य कर रहे हैं, जिनकी पदस्थापना जिले के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों और ब्लॉकों में है। इनमें डॉ. कुमार पुष्पेश, बजरंग लाल पटेल (सहायक ग्रेड-3), मुकेश प्रजापति (फार्मासिस्ट), धर्मेन्द्र गौरहा (सुपरवाइजर), रेशम कुरें (सुपरवाइजर), प्रतिमा तंवर, मो. इरफान खान (सचिवीय सहायक), अजित रात्रे और रीता गुप्ता सहित अन्य नाम चर्चाओं में हैं।
आरोप है कि दस्तावेजों में इनकी पदस्थापना अलग-अलग संस्थानों में दर्शाई गई है, लेकिन वास्तविक कार्य अब भी CMHO कार्यालय से लिया जा रहा है।
डॉ. कुमार पुष्पेश को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
इन नामों में सबसे अधिक चर्चा डॉ. कुमार पुष्पेश को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि उनकी पदस्थापना करतला क्षेत्र में है, लेकिन इसके बावजूद वे अब तक CMHO कार्यालय में सक्रिय हैं।
इसी को लेकर विभागीय कर्मचारियों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब अन्य कर्मचारियों को तत्काल मूल स्थानों पर भेजा गया, तो फिर कुछ लोगों को अब तक छूट क्यों दी जा रही है? कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी आम हो चुकी है कि क्या प्रभावशाली और “करीबी” माने जाने वाले कर्मचारियों के लिए अलग नियम लागू हैं।
निष्पक्षता और पारदर्शिता पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश कहीं केवल औपचारिकता बनकर तो नहीं रह गया। कर्मचारियों का कहना है कि यदि नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर कुछ कर्मचारियों को विशेष संरक्षण क्यों दिया जा रहा है।
विभागीय कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब आदेश जारी करने वाला कार्यालय ही पूरी तरह पालन सुनिश्चित नहीं कर पाएगा, तो नीचे के अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्ती किस आधार पर की जाएगी।
अब CMHO के अगले कदम पर नजर
पूरा मामला सामने आने के बाद अब निगाहें CMHO डॉ. सूर्यनारायण केशरी की आगामी कार्रवाई पर टिक गई हैं। विभागीय कर्मचारियों और आम लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या सभी कर्मचारियों को वास्तव में उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाएगा या फिर स्वास्थ्य विभाग में “विशेष कृपा” और “चहेतों” की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर प्रशासनिक स्तर पर क्या निर्णय होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी

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