कई जगह इलाज के बाद निराश हुए परिवार ने लिया आयुर्वेद का सहारा, चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के उपचार से स्वस्थ होने का किया दावा
छत्तीसगढ़/कोरबा :- आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के बाद कोरबा के पीडब्ल्यूडी कॉलोनी निवासी राजमणि सोंठीया और उनके परिवार ने आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लिया। सोंठीया परिवार का दावा है कि आयुर्वेदिक उपचार से उनके पुत्र की साइनस संबंधी समस्या, स्वयं के डेंगू संक्रमण और उनकी पत्नी की गांठ की समस्या में राहत मिली तथा वर्तमान में पूरा परिवार स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहा है।
राजमणि सोंठीया ने बताया कि उनके पुत्र को लंबे समय से साइनस की समस्या थी, जिसके कारण उसे सांस लेने में परेशानी, लगातार सर्दी और कमजोरी का सामना करना पड़ता था। रायपुर और बिलासपुर सहित विभिन्न स्थानों पर उपचार कराने के बावजूद विशेष लाभ नहीं मिला और चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन की सलाह दी गई थी। इसके बाद उन्होंने परिचितों की सलाह पर कोरबा के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से संपर्क किया। सोंठीया के अनुसार, आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन के बाद लगभग तीन माह में उनके पुत्र को राहत मिली और ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।
उन्होंने बताया कि इसके बाद वे स्वयं डेंगू की चपेट में आ गए थे। गंभीर स्थिति के बीच उन्होंने पुनः डॉ. शर्मा से उपचार लिया और एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य में सुधार महसूस किया। उनका कहना है कि तब से वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
इसी प्रकार उनकी पत्नी को गांठ की समस्या थी, जिसके लिए विभिन्न स्थानों पर उपचार कराने के बाद ऑपरेशन की संभावना जताई गई थी। राजमणि सोंठीया के अनुसार, आयुर्वेदिक उपचार के बाद उनकी पत्नी को भी धीरे-धीरे राहत मिली और बाद में कराई गई जांच रिपोर्ट सामान्य आई। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से उनकी पत्नी को किसी प्रकार की परेशानी नहीं है और वह सामान्य जीवन जी रही हैं।
राजमणि सोंठीया ने आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए लोगों से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को भी प्राथमिकता देने की अपील की।
वहीं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि यह किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि आयुर्वेद की प्राचीन और ऋषि परंपरा से प्राप्त ज्ञान का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद मानव कल्याण के लिए समर्पित एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है और वे स्वयं को इस परंपरा का एक साधारण संवाहक मानते हैं।
सोंठीया परिवार के अनुभव ने एक बार फिर आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति लोगों की बढ़ती आस्था को सामने लाया है। हालांकि विभिन्न रोगों के उपचार के संबंध में विशेषज्ञों की सलाह और आवश्यक चिकित्सकीय जांच भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।











