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हाथी के हमले में मंडी प्रभारी की मौत: सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने परिवार को दी 10 हजार की सहायता, क्षेत्र में दहशत

छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले के हाथी प्रभावित क्षेत्र कुदमुरा में धान की रखवाली के दौरान जंगली हाथी के हमले में मंडी प्रभारी की दर्दनाक मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और दहशत का माहौल है। घटना के बाद जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ कोरबा ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की है।

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जानकारी के अनुसार आदिवासी सेवा सहकारी समिति कोरकोमा के धान उपार्जन केंद्र कुदमुरा में धान की सुरक्षा के लिए मंडी प्रभारी राजेश कुमार सिंह अपनी पत्नी और अन्य कर्मचारियों के साथ अस्थायी झोपड़ी में रुककर निगरानी कर रहे थे। मंगलवार-बुधवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे अचानक एक दंतैल जंगली हाथी उपार्जन केंद्र में पहुंच गया।

हाथी को टॉर्च और शोर मचाकर भगाने की कोशिश की गई, लेकिन इसी दौरान हाथी ने राजेश कुमार सिंह को अपनी चपेट में ले लिया। हाथी के हमले से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनकी पत्नी और अन्य कर्मचारी किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई। इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। मृतक के परिवार में भी गहरा शोक व्याप्त है।

इस दुखद घटना के बाद जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ कोरबा के पदाधिकारी मृतक के घर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार को 10 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा सहकारी परिवार मृतक के परिजनों के साथ खड़ा है।

इस अवसर पर संघ के पदाधिकारी विनोद भट्ट, वेद प्रकाश वैष्णव, तुलेश्वर कौशिक, चंद्रशेखर कैवत, अशोक दुबे, दुलीचंद धीवर, कमल दुबे, मुरली मनोहर दुबे, दिनेश पटेल, दुर्योधन कंवर, शशिकांत वैष्णव सहित कोरकोमा समिति के अध्यक्ष ईश्वर सिंह राठिया, प्रभारी प्रबंधक बृजभवन सिंह तंवर और समिति के कर्मचारी उपस्थित रहे।

मानव-हाथी संघर्ष बनता जा रहा गंभीर समस्या
कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्रों में लगातार बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। धान उपार्जन केंद्रों और खेतों की रखवाली कर रहे लोगों को अक्सर जंगली हाथियों का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों में मानवीय हस्तक्षेप और भोजन की तलाश में जंगल से बाहर आना इस तरह की घटनाओं को बढ़ा रहा है।

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