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खेती में बदलाव से किसानों की आय बढ़ाने पर जोर, जिले की 198 उर्वरक दुकानों की होगी जांच

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को जिले में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशासन ने अब कृषि क्षेत्र में लक्ष्य आधारित और मैदानी स्तर पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कृषि, उद्यानिकी, पशुधन, मत्स्य एवं संबंधित विभागों की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक रूप से किसानों तक पहुंचे। 

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बैठक में फसल विविधीकरण, मिट्टी की जांच, प्राकृतिक खेती, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), फसल बीमा और कृषि आदानों की गुणवत्ता को विशेष प्राथमिकता दी गई। कलेक्टर ने अधिकारियों से निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने के साथ ही योजनाओं की मैदानी मॉनिटरिंग मजबूत करने को कहा।

रागी और रामतिल की खेती बढ़ाने की तैयारी

जिले में पारंपरिक फसलों के साथ अधिक लाभदायक एवं उपयुक्त फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष जोर दिया गया है। कलेक्टर ने रागी के फसल क्षेत्र में 25 प्रतिशत वृद्धि तथा रामतिल के क्षेत्र को दोगुना करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

दलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए बीज मिनीकिट के माध्यम से अधिक किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही कोदो, कुटकी सहित अन्य वैकल्पिक एवं पोषक फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए।

198 उर्वरक दुकानों पर प्रशासन की नजर

बैठक का सबसे अहम निर्णय जिले की सभी 198 उर्वरक दुकानों की जांच से जुड़ा रहा। कलेक्टर ने शासकीय एवं निजी उर्वरक दुकानों की ब्लॉकवार सूची तैयार कर प्रत्येक दुकान से नमूने लेने और उनकी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि किसानों को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध हो। कलेक्टर ने नमूना संकलन और जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की स्पष्ट चेतावनी दी।

तीन साल में सभी किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड

मिट्टी की गुणवत्ता और संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर भी प्रशासन ने दीर्घकालीन लक्ष्य तय किया है। कलेक्टर ने प्रत्येक वर्ष लगभग 25 हजार किसानों की मिट्टी जांच कराने तथा आगामी तीन वर्षों में जिले के सभी किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। बारिश समाप्त होने के बाद मैदानी अमले को किसानों से लगातार संपर्क कर निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है।

प्राकृतिक खेती और एफपीओ बनेंगे किसानों की ताकत

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर रिसोर्स पर्सन से शत-प्रतिशत कार्य लेने, मैदानी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने तथा किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए। जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया सितंबर तक पूर्ण कराने पर भी जोर दिया गया।

वहीं किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। कृषि क्षेत्र में 1200 और उद्यानिकी क्षेत्र में 400 एफपीओ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषक चौपाल आयोजित कर किसानों को एफपीओ से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

फसल बीमा में अऋणी किसानों पर फोकस

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पिछले वर्ष की तुलना में अऋणी किसानों की फसल बीमा कवरेज बढ़ाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को गांवों में किसानों को योजना की जानकारी देने और उन्हें फसल बीमा के लिए प्रेरित करने को कहा गया। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के निर्धारित लक्ष्य को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

30 सितंबर तक पंजीयन पूरा करने का लक्ष्य

नलकूप खनन, जैविक खेती प्रशिक्षण, बीज उत्पादन और अन्य योजनाओं के लिए किसानों के पंजीयन की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कृषक उन्नति योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा दलहन-तिलहन फसल प्रदर्शन के लक्ष्यों को पूरा करने के निर्देश दिए।

किसानों का आवश्यक पंजीयन 30 सितंबर तक सुनिश्चित करने को कहा गया है। एग्रीस्टैक के अंतर्गत वनपट्टाधारी किसानों के आधार नंबर, वनपट्टे में दर्ज नाम सहित आवश्यक जानकारी तहसील के माध्यम से भेजने के निर्देश दिए गए।

मत्स्य और पशुधन क्षेत्र में भी लक्ष्य आधारित काम

कृषि के साथ मत्स्य एवं पशुधन क्षेत्र की योजनाओं की भी समीक्षा हुई। मत्स्य विभाग को एक्वा पार्क, केज कल्चर, मत्स्य बीज वितरण और मत्स्य पालकों के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। मत्स्य पालकों के किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन बढ़ाने तथा जल क्षेत्र आवंटन में तेजी लाने को कहा गया।

पशुधन विभाग को कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य पूरे करने, टीकाकरण अभियान पूर्ण करने और अधिक से अधिक पशु चिकित्सा शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए। मोबाइल वेटेरिनरी वैन से संबंधित लक्ष्य में पीछे चल रहे कार्यों में तेजी लाने को भी कहा गया।

रेशम उत्पादन से लेकर कृषि विज्ञान केंद्र तक समीक्षा

कलेक्टर ने रेशम विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जमीन धागाकरण का कार्य बढ़ाने और इससे जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। कृषि विज्ञान केंद्र को किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, तकनीकी सलाह और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने को कहा गया।

प्रशासन का संदेश—लक्ष्य सिर्फ कागज पर नहीं, खेत तक पहुंचे

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की समीक्षा से यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन अब कृषि योजनाओं की प्रगति को केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि किसानों तक वास्तविक लाभ पहुंचने और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव के नजरिए से आगे बढ़ाना चाहता है।

फसल विविधीकरण से लेकर प्राकृतिक खेती, मिट्टी की जांच, गुणवत्तापूर्ण उर्वरक, फसल बीमा और एफपीओ तक प्रशासन ने कृषि क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को एक साथ जोड़ा है। यदि निर्धारित लक्ष्यों का मैदानी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे जिले में खेती की लागत कम करने, वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने और किसानों की आय के नए अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम सामने आ सकते हैं।

बैठक में उप संचालक कृषि श्री देवेन्द्र सिंह कंवर, रेशम अधिकारी श्री बलभद्र सिंह भंडारी, पशुधन चिकित्सा विभाग से श्री एस.एन. मिश्रा सहित मत्स्य पालन, कृषि विज्ञान केंद्र एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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