ग्रामीणों के बीच बैठकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सुनी समस्याएं, समग्र विकास की मांगी कार्ययोजना
छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोयला खनन से प्रभावित गांवों में विकास की तस्वीर बदलने जिला प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने खनन प्रभावित ग्रामों को चरणबद्ध तरीके से आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में पंचायतों से गांव की समग्र विकास कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। कलेक्टर ने ढेलवाडीह, जवाली, डोंगरी, रंजना, बतारी और बेलटिकरी पहुंचकर ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं और विकास की प्राथमिकताएं तय करने के लिए सीधे संवाद किया।
कलेक्टर ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि गांव के विकास की योजना केवल अधिकारियों के स्तर पर नहीं, बल्कि पंच, सरपंच और ग्रामीणों की सहभागिता से तैयार की जाए। प्रत्येक गांव की जरूरत के अनुसार पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता में शामिल किया जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवश्यक कार्यों के लिए राशि की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। 
डीएमएफ के पुराने काम पहले पूरे होंगे
खनन प्रभावित क्षेत्रों में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से स्वीकृत कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने पुराने और अधूरे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पंचायतों द्वारा स्वीकृत कार्य समय-सीमा में पूरे किए जाएंगे, उन्हें भविष्य में नए कार्यों की स्वीकृति में प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क मरम्मत, पेयजल के लिए बोर एवं सोलर ड्यूल पंप, पानी की टंकियां, जर्जर स्कूल और आंगनबाड़ी भवनों की मरम्मत, नए आंगनबाड़ी भवन तथा सामुदायिक भवन जैसे कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। 
ज्यादा बिजली बिल की शिकायत, गांव में लगेगा शिविर
ग्रामीणों ने कलेक्टर के समक्ष अधिक बिजली बिल आने की शिकायत रखी। मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने विद्युत विभाग को गांव में शिविर लगाकर बिजली बिलों की जांच करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की पहल भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि घर की छत पर सोलर सिस्टम लगाने के इच्छुक परिवार पंचायत के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। जिन परिवारों के घरों में छत की उपयुक्त व्यवस्था नहीं है, वे 8 से 15 लोगों का समूह बनाकर सामूहिक सोलर सिस्टम के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे बिजली खर्च कम करने के साथ अतिरिक्त बिजली उत्पादन से आय का अवसर भी मिल सकता है। 
बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर
कलेक्टर ने ग्रामीणों से बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उनकी पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने बताया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए जिला प्रशासन की ओर से सहयोग दिया जा रहा है।
10वीं के बाद नीट, जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पात्र विद्यार्थियों को आवासीय कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं 12वीं के बाद देश के बड़े शासकीय शिक्षण संस्थानों में मेडिकल, इंजीनियरिंग सहित अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों की फीस जिला प्रशासन द्वारा संबंधित संस्था को दिए जाने की व्यवस्था है। 
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की रणनीति
ग्रामीण महिलाओं से संवाद के दौरान कलेक्टर ने महतारी वंदन योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी ली। पात्र होने के बावजूद योजना से वंचित महिलाओं के नाम निर्धारित प्रक्रिया से जोड़ने की बात कही गई।
महिलाओं को लाइवलीहुड कॉलेज के माध्यम से सिलाई सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। महिला स्व-सहायता समूहों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ई-रिक्शा, दोना-पत्तल मशीन, मिनी राइस मिल, आटा चक्की, कोसा धागाकरण, स्कूल ड्रेस निर्माण, सिलाई, प्रिंटिंग प्रेस और कचरा संग्रहण जैसे कार्यों के लिए सहयोग देने की संभावना भी बताई गई। 
किसानों से 30 सितंबर तक पंजीयन की अपील
कलेक्टर ने किसानों को धान खरीदी के लिए चल रहे डिजिटल सर्वे और गिरदावरी की जानकारी देते हुए नए किसानों से 30 सितंबर तक पंजीयन कराने की अपील की। जिन किसानों का पिछले वर्ष पंजीयन हो चुका है, उन्हें दोबारा पंजीयन की आवश्यकता नहीं होगी।
नया शासकीय अथवा वन पट्टा प्राप्त करने वाले, रकबे में संशोधन कराने वाले या पिछले वर्ष पंजीयन से वंचित किसानों को निर्धारित समय में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने कहा गया। कलेक्टर ने किसानों से 2 अक्टूबर की ग्रामसभा में उपस्थित रहकर गिरदावरी सूची में अपने नाम और रकबे का मिलान करने की अपील भी की। 
ग्रामसभा के प्रस्ताव से जाति प्रमाणपत्र की राह आसान
जाति प्रमाणपत्र नहीं होने की शिकायत पर कलेक्टर ने ग्रामीणों को बताया कि जिन लोगों के पास जाति संबंधी पुराने दस्तावेज अथवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत ग्रामसभा के प्रस्ताव के आधार पर जाति प्रमाणपत्र बनवाने की कार्रवाई कर सकते हैं। अधिकारियों को ग्रामीणों को इस संबंध में आवश्यक जानकारी और सहयोग देने के निर्देश दिए गए। 
विद्यार्थियों और बुजुर्गों के लिए ई-रिक्शा
गांवों में आवागमन की समस्या को देखते हुए कलेक्टर ने एक महत्वपूर्ण पहल का प्रस्ताव रखा। उन्होंने ग्रामीणों से ऐसे युवक का चयन करने को कहा जो ई-रिक्शा चला सके। प्रशासन की ओर से ई-रिक्शा उपलब्ध कराया जाएगा, जिसका उपयोग स्कूली विद्यार्थियों, बुजुर्गों और जरूरतमंद ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए किया जा सकेगा। 
स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन में ग्रामीणों की भागीदारी जरूरी
ग्रामीणों ने स्ट्रीट लाइट, कचरा संग्रहण और पेयजल जैसी सुविधाओं की मांग रखी। कलेक्टर ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को लंबे समय तक संचालित करने के लिए पंचायत और ग्रामीणों की सामुदायिक भागीदारी जरूरी है।
स्ट्रीट लाइट लगाने की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन बिजली बिल का भुगतान पंचायत को करना होगा। इसी तरह कचरा संग्रहण के लिए ई-रिक्शा और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जबकि इसे संचालित करने वाले समूहों को आजीविका के लिए आवश्यक राशि पंचायत स्तर से उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी होगी। 
तीन माह में घर-घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य
जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने संबंधित ठेकेदारों को तीन माह के भीतर पेयजलापूर्ति शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि घरों तक पानी पहुंचने के बाद ही कार्य का सत्यापन और भुगतान किया जाएगा।
पेयजल व्यवस्था शुरू होने के बाद बिजली बिल और पंप में खराबी जैसी आकस्मिक जरूरतों के लिए पंचायतों को नियमानुसार आवश्यक राशि की व्यवस्था करने की बात भी कही गई। 
शिकायतों पर जांच और कार्रवाई के निर्देश
ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत शिकायतों पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए। इनमें वन पट्टों से जुड़े मामले, बिजली बिलों की जांच, अवैध शराब और गांजा बिक्री की शिकायतें तथा डोंगरी उच्चतर विद्यालय के स्वीकृत भवन का अधूरा निर्माण शामिल है।ग्राम बेलटिकरी में मानदेय शिक्षक की भर्ती में कथित अनियमितता की शिकायत की भी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
सड़क से देवगुड़ी तक विकास की मांग
ग्रामीणों ने पानी की समस्या, भारी वाहनों वाले मार्गों पर स्ट्रीट लाइट, बाजार शेड, उप स्वास्थ्य केंद्र में पेवर ब्लॉक, जर्जर मिडिल स्कूल भवन की मरम्मत, सीसी सड़क, नालियों की सफाई, ढपढप में सीसी सड़क निर्माण और देवगुड़ी के विकास सहित कई मांगें रखीं। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को इन मांगों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
प्रशासन और ग्रामीण मिलकर बदलेंगे गांवों की तस्वीर
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि खनन प्रभावित ग्रामों में विकास का लक्ष्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं को मजबूत कर ग्रामीणों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। उन्होंने ग्रामीणों से विकास कार्यों की निगरानी और संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
इस दौरान जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, एसडीएम कटघोरा विपिन दुबे, अपर कलेक्टर माधुरी सोम ठाकुर, जनपद सीईओ, बीईओ, तहसीलदार, ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।












