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कोरबा लोकसभा में बीजेपी की राह आसान नहीं, कोरबा लोकसभा के बीजेपी के स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं को 10 वर्ष बेवजह बर्बाद होने का सता रहा डर

छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा लोकसभा सीट से बीजेपी की राह आसान नहीं लग रही है क्योंकि जिस प्रकार कोरबा लोकसभा सीट से स्थानीय भाजपा नेता को टिकट न देकर पार्टी ने दुर्ग की नेत्री सरोज पांडे को कोरबा लोकसभा सीट से बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया है उसके बाद से ही कोरबा लोकसभा सीट से दावेदारी कर रहे तमाम स्थानीय नेताओं व उनके समर्थक व भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी मायूसी देखी गई, ऐसा लगता है जैसे कोरबा लोकसभा सीट से बीजेपी की प्रत्याशी सरोज पांडे के जीतने पर कोरबा लोकसभा सीट के स्थानीय दावेदार नेताओं व उनके समर्थक कम से कम 10 साल बेवजह समय बर्बाद करेंगे, क्योंकि भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडे अगर अबकी बार 2024 में कोरबा लोकसभा से चुनाव जीतती हैं तो निश्चित तौर पर अगली बार पार्टी पुनः उन्हें कोरबा लोकसभा सीट से मौका देते हुए प्रत्याशी बनाएगी जिसके कारण बीजेपी के स्थानीय नेता जो लोकसभा सीट से दावेदारी कर रहे थे वह 10 साल के लिए चुनाव नहीं लड़ पाने की स्थिति में बेदखल जैसे हो जाएंगे, यही डर लोकसभा सीट से बीजेपी पार्टी से दावेदारी करने और बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ने वाले वाले बीजेपी के नेताओं को सता रहा है, हालांकि कोई भी बीजेपी के नेता व कार्यकर्ता खुलकर कुछ नहीं बोल पा रहे हैं, इनमें से कई ऐसे नेता हैं जो जीवन भर पार्टी के लिए कार्य किया अब बढ़ती उम्र के कारण एक मौके की तलाश थी उसमें भी पार्टी ने पानी फेर दिया, स्थानीय नेताओं को नजर अंदाज करना कहीं पार्टी को भारी न पड़ जाए ।

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वही स्थानीय वोटरों में भी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है जहां एक ओर वोटर मोदी के नाम पर वोट देने का मन बना रहा है तो वही स्थानीय प्रत्याशी न होने के कारण और हाल ही में इलेक्टोरल बॉन्ड में हुए भ्रष्टाचार के खुलासे के बाद वोटरों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है वही कोरबा लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी ने पुनः श्रीमती ज्योत्सना महंत को प्रत्याशी बनाया है जो स्थानीय भी है, तमाम सवालों के बीच मतदाताओं की सोंच बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए स्थानीय और बाहरी के रूप में बनी हुई है अब देखना होगा की मौके की नजाकत को कौन अच्छे से भुना सकता है, हालांकि अभी नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई वोटिंग के लिए अभी बहुत समय बाकी है, और अभी कई राजनीतिक पार्टियों व निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में आएंगे इसके बाद समीकरण में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा, मतदाता भी अपना बहुमूल्य वोट देकर 5 साल के लिए जिसे सांसद बनना चाह रहा है वह भी चौक चौराहा पान ठेलो बाजारों में लोगों से फीडबैक ले रहे हैं ।

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