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आदिवासी की निजी जमीन पर आंगनबाड़ी भवन निर्माण का आरोप, जनपद उपाध्यक्ष ने धमकाया कहा तुम्हारी रजिस्ट्री 5 मिनट में शून्य करवा दूंगा, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग  

पसान में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और निर्माण की वैधानिकता जांचने की मांग

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  पसान तहसील क्षेत्र के ग्राम साढ़ामार में निजी परिवर्तित भूमि पर शासकीय आंगनबाड़ी भवन बनाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्राम निवासी शिव प्रकाश कुशराम ने कलेक्टर कोरबा को शिकायत सौंपकर तहसीलदार एवं जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष प्रकाशचंद जाखड़ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसकी स्वामित्व वाली भूमि पर उसकी आपत्ति के बावजूद शासकीय भवन का निर्माण कराया जा रहा है।

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शिकायत के अनुसार कुशराम के नाम खसरा नंबर 187/3 एवं 187/5, रकबा क्रमशः 0.0650 एवं 0.105 हेक्टेयर भूमि दर्ज है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त भूमि उसने विधिवत पंजीयन के माध्यम से खरीदी तथा बाद में उसका डायवर्सन भी कराया गया। वर्ष 2025 में उसने निर्माण रोकने के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन दिया था।

‘तुम बाहरी हो, पसान में नहीं बसने दूंगा’—धमकी देने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भूमि विवाद को लेकर प्रकाशचंद जाखड़ ने उसे फोन पर धमकाते हुए कहा कि वह बाहरी व्यक्ति है और उसे पसान में नहीं बसने दिया जाएगा। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि उसे अपनी जमीन से संबंधित आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया तथा कथित तौर पर कहा गया कि उसकी रजिस्ट्री कुछ ही मिनटों में शून्य करवा दी जाएगी।

शिकायतकर्ता के अनुसार वह अपनी जमीन की सुरक्षा को लेकर तहसीलदार के पास स्थगन आदेश की मांग लेकर पहुंचा, लेकिन उसे कथित रूप से प्रकाशचंद जाखड़ के साथ चर्चा करने के लिए कहा गया।

बंद कमरे में पांच लाख रुपये मांगने का भी आरोप

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप यह है कि तहसीलदार के कक्ष में कथित रूप से प्रकाशचंद जाखड़ की मौजूदगी में शिकायतकर्ता से जमीन छोड़ने के बदले पांच लाख रुपये देने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस दौरान उस पर यह कहते हुए दबाव बनाया गया कि यदि वह उक्त व्यक्ति के अनुसार नहीं चलेगा तो उसकी जमीन उसके हाथ से निकल जाएगी।

हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

दस्तावेजों को कार्रवाई में शामिल नहीं करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसने भूमि की रजिस्ट्री, डायवर्सन समेत अन्य दस्तावेज तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किए थे, लेकिन कथित रूप से उसके दस्तावेजों को प्रकरण की कार्रवाई में शामिल नहीं किया गया। उसने पूरे मामले की जांच कर दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक भूमि स्वामित्व और निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

‘निजी भूमि पर कैसे बन सकता है शासकीय भवन?’

शिव प्रकाश कुशराम ने कलेक्टर से यह भी जांच कराने की मांग की है कि यदि भूमि वास्तव में निजी स्वामित्व की है तो संबंधित भूमि पर पंचायत अथवा अन्य शासकीय एजेंसी द्वारा आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किस आधार पर कराया गया। साथ ही आसपास के खसरा नंबरों पर बने मकानों और उनके भूमि स्वामित्व की भी जांच की मांग की गई है।

कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, भूमि संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण करने, निर्माण की वैधानिकता की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मामले में अब प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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