666 बालिका शौचालय, 210 मुक्तिधाम और 1183 जल संरक्षण संरचनाओं सहित ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार पर जोर; पांचों विकासखंडों में रोजगार और विकास कार्यों को गति
छत्तीसगढ़/कोरबा :- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, जल संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के उद्देश्य से कोरबा जिले में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत अब तक 127 करोड़ रुपये की लागत के 3056 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों में बालिका शौचालय, मुक्तिधाम, पीडीएस भवन, ग्राम पंचायत एवं आंगनवाड़ी भवन के निर्माण के साथ कृषि डबरी, परकोलेशन टैंक और तालाब गहरीकरण जैसी जल संरक्षण संरचनाओं को प्राथमिकता दी गई है।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के निर्देशन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले की ग्राम पंचायतों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप रोजगारमूलक और उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत जिले के पांचों विकासखंडों में ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए विभिन्न कार्यों को मंजूरी दी गई है।
666 बालिका शौचालय और 210 मुक्तिधाम बनेंगे
योजना के तहत जिले के 600 से अधिक शासकीय विद्यालयों में 666 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 210 मुक्तिधाम, 215 सैंड फिल्टर बोरवेल, 68 सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) भवन तथा 35 ग्राम पंचायत एवं आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
विद्यालयों में बालिका शौचालयों के निर्माण से छात्राओं को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं, मुक्तिधाम और अन्य सामुदायिक भवनों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार होगा।
‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण पर जोर
जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत 1283 कृषि डबरी, 215 परकोलेशन टैंक, 80 कंटूर ट्रेंच और 203 तालाबों के गहरीकरण के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संचयन, भू-जल स्तर बढ़ाने और कृषि कार्यों के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि डबरी और तालाब गहरीकरण जैसे कार्यों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। वहीं, परकोलेशन टैंक और कंटूर ट्रेंच के निर्माण से वर्षा जल को जमीन में समाहित करने तथा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।
125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान
योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर काम देने के साथ गांवों में टिकाऊ सार्वजनिक परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाना है।
ग्राम पंचायतों में पीडीएस भवन, महिला स्व-सहायता समूहों के वर्कशेड और अन्य उपयोगी अधोसंरचनाओं के निर्माण से सामुदायिक सुविधाओं के विस्तार के साथ ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
रोजगार के साथ ग्रामीण अधोसंरचना का विस्तार
जिले में स्वीकृत 3056 कार्यों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने, जल संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बालिका शौचालयों, मुक्तिधामों, बोरवेल और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से गांवों की स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
योजना के तहत इन कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और गांवों को सुविधायुक्त तथा जल समृद्ध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।












