छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा मातृ मृत्यु की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से समय पर स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार एवं सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मां और बच्चे की सुरक्षा केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।
गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही कराएं पंजीयन
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही मितानिन या एएनएम को इसकी सूचना दें और 45 दिनों के भीतर गर्भावस्था का पंजीयन कराएं। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में कम से कम एक बार चिकित्सकीय जांच कराना बेहद जरूरी है।
चार प्रसव पूर्व जांच अनिवार्य
गर्भवती महिला की कम से कम चार नियमित प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) कराना आवश्यक है। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रत्येक माह की 9 एवं 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जांच की सुविधा उपलब्ध है। इस दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, पेशाब, सिकल सेल सहित आवश्यक जांच निःशुल्क की जाती हैं।
एनीमिया और सिकल सेल को गंभीरता से लें
हीमोग्लोबिन कम होने या सिकल सेल की पुष्टि होने पर इसे नजरअंदाज न करें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित लें। हरी सब्जियां, गुड़-चना एवं पौष्टिक आहार का सेवन करें। आवश्यकता पड़ने पर रक्त की व्यवस्था में देरी न हो, इसके लिए संभावित रक्तदाताओं के नाम और मोबाइल नंबर पहले से सुरक्षित रखना भी उपयोगी है।
जोखिम वाली गर्भावस्था में उच्च स्वास्थ्य संस्था में कराएं प्रसव
कम उम्र, जुड़वा गर्भ, उच्च रक्तचाप, पूर्व में ऑपरेशन या सीजेरियन प्रसव तथा अन्य चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का प्रसव डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज जैसे उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में कराया जाए। ऐसे मामलों में घर पर प्रसव कराने का जोखिम न लें।
प्रसव से पहले परिवहन की रखें तैयारी
परिवार के सदस्य 108 एंबुलेंस का नंबर मोबाइल में सेव रखें और प्रसव की संभावित तिथि से पहले परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। विशेष रूप से दूरस्थ एवं बरसात से प्रभावित क्षेत्रों, जैसे पोड़ी उपरोड़ा और करतला, की गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से लगभग सात दिन पहले अस्पताल के नजदीक पहुंचने की सलाह दी गई है।
खतरे के लक्षण दिखें तो तत्काल अस्पताल पहुंचें
गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार या दौरे, अत्यधिक रक्तस्त्राव, बढ़ा हुआ रक्तचाप, तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंध या अंधेरा छाना, पानी की थैली फटना तथा बच्चे की हलचल कम या बंद होना जैसे खतरे के लक्षण दिखाई दें तो बिल्कुल देरी न करें। तत्काल स्वास्थ्य संस्था से संपर्क कर 108 एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाएं।
प्रसव के बाद 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
प्रसव के बाद के शुरुआती 48 घंटे मां और नवजात दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे स्वास्थ्य संस्था में चिकित्सकीय निगरानी में रखना जरूरी है। घर लौटने के बाद भी बुखार, अत्यधिक रक्तस्त्राव, बदबूदार स्राव या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।
कलेक्टर ने की परिवारों से विशेष अपील
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने जिलेवासियों से अपील की है कि गर्भवती महिला की देखभाल को परिवार अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी माने। प्रथम तीन महीने के भीतर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय सलाह का पालन और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए समय पर उठाया गया एक कदम जीवन बचा सकता है। सुरक्षित मातृत्व केवल डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी है।












