HomeBreaking Newsशॉप फ्लोर से नेतृत्व तक: बालको की महिला इंजीनियरों ने बदली मैन्यूफैक्चरिंग...

शॉप फ्लोर से नेतृत्व तक: बालको की महिला इंजीनियरों ने बदली मैन्यूफैक्चरिंग की तस्वीर

तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व के दम पर उत्पादन, प्रचालन, खनन व सुरक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में बना रहीं अलग पहचान

छत्तीसगढ़/कोरबा-बालकोनगर :-  मैन्यूफैक्चरिंग और मेटल इंडस्ट्री में इंजीनियरिंग एवं तकनीकी भूमिकाओं को कभी पुरुषों के वर्चस्व वाला क्षेत्र माना जाता था। बदलते दौर में इस सोच को पीछे छोड़ते हुए बालको की महिला इंजीनियर उत्पादन, प्रचालन, खनन और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी दक्षता और नेतृत्व क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन कर रही हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल बालको की प्रगति को नई गति दे रही हैं, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाली नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।

- Advertisement -

शॉप फ्लोर पर काबिलियत बनी पहचान

आईपीएस एकेडमी, इंदौर से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली अंशिका सिंह ने बालको से जुड़ने के बाद एल्यूमिनियम इंडस्ट्री के चुनौतीपूर्ण कास्ट हाउस में अपनी अलग पहचान बनाई। शुरुआती दौर में शॉप फ्लोर पर खुद को साबित करना और सहकर्मियों का विश्वास हासिल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन मेहनत, तकनीकी समझ और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया।

अंशिका ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के भरोसे और नए विचारों पर काम करने के अवसर ने उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। इसी क्रम में उन्होंने सम्मान एवं पुरस्कार’ पहल शुरू की, जिससे टीम का उत्साह बढ़ा और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिली।

आज अंशिका की पहचान शॉप फ्लोर पर महिला इंजीनियर के रूप में नहीं, बल्कि उनकी काबिलियत और कार्यक्षमता के आधार पर होती है। उनकी यात्रा उन महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का रास्ता खोल रही है, जो मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में तकनीकी भूमिका निभाने का सपना देखती हैं।

तकनीक के साथ नेतृत्व का उदाहरण बनीं अरुणा

बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कॉलेज के बाद सीधे प्लांट में काम शुरू करने को लेकर शुरुआती झिझक के बावजूद सहकर्मियों के सहयोग और वरिष्ठ अधिकारियों के विश्वास ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। पिछले चार वर्षों में उन्होंने अपनी मेहनत और सीखने की ललक के जरिए कार्यक्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई।

अरुणा का मानना है कि कार्यस्थल पर सफलता केवल पद या वरिष्ठता से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता से निभाने से मिलती है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी टीम के साथ बालको के बिजली बैकअप सिस्टम को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

टीम ने पूरे सिस्टम को SCADA के माध्यम से केंद्रीकृत किया। इससे विभिन्न प्रकार के डेटा की निगरानी और विश्लेषण के जरिए संभावित समस्याओं की समय रहते पहचान संभव हुई और बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिली। इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए अरुणा को प्लांट के सर्वोच्च सम्मान ‘सीईओ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

महिला शक्ति से मजबूत हो रही मेटल इंडस्ट्री

अंशिका और अरुणा की कहानियां केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं। ये उस बदलाव की तस्वीर हैं, जिसमें तकनीकी दक्षता, नेतृत्व और आत्मविश्वास ने कार्यक्षेत्र में लैंगिक सीमाओं को पीछे छोड़ दिया है।

बालको की महिला इंजीनियर आज मशीनों और आधुनिक तकनीक के बीच जिम्मेदारियां संभालने से लेकर टीमों का नेतृत्व करने तक, हर स्तर पर अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। उनकी उपलब्धियां स्पष्ट संदेश देती हैं कि अवसर, विश्वास और अनुकूल कार्य-वातावरण मिले तो महिलाएं एल्यूमिनियम उत्पादन जैसे चुनौतीपूर्ण उद्योग के हर क्षेत्र में सफलता का नया अध्याय लिख सकती हैं।

Must Read