भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत के बाद अब आंदोलन की तैयारी; बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे संचालनालय
छत्तीसगढ़/रायपुर :- चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा डेमॉस्ट्रेटर (प्रदर्शक) पदों पर की जा रही भर्ती प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में कई गंभीर विसंगतियों, पारदर्शिता की कमी और नियमों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच तथा संशोधित मेरिट सूची जारी करने की मांग की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में सामने आई अनियमितताओं से चयन की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
दावा-आपत्तियों के निराकरण पर सवाल
प्रोविजनल पात्रता सूची जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने दावा-आपत्तियां प्रस्तुत की थीं। इनमें से कई आपत्तियां स्वीकार कर संबंधित अभ्यर्थियों को पात्र घोषित कर दिया गया, लेकिन किस आधार पर आपत्तियां स्वीकार की गईं और किन कारणों से निर्णय लिया गया, इसका कोई कारणयुक्त (स्पीकिंग) आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि इससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।
बी.एससी. या एम.एससी. नर्सिंग—मेरिट का आधार क्या?
विज्ञापन में पात्रता बी.एससी. नर्सिंग के साथ तीन वर्ष का अनुभव अथवा एम.एससी. नर्सिंग निर्धारित की गई थी, लेकिन इंटरव्यू सूची के परीक्षण में केवल बी.एससी. नर्सिंग के अंकों को मेरिट का आधार बनाया गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि विज्ञापन में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि केवल बी.एससी. नर्सिंग के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार होगी। ऐसे में एम.एससी. नर्सिंग में अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थियों के साथ समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित हुआ है।
केवल पांच गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाने पर आपत्ति
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती विज्ञापन में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि केवल पदों के पांच गुना अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। विज्ञापन में शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू के लिए निर्धारित वेटेज का उल्लेख है। ऐसे में सभी पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर मिलना चाहिए था। उनका आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान नया नियम लागू किया गया।
मेरिट सूची की जगह केवल इंटरव्यू सूची जारी
इंटरव्यू के लिए जारी सूची में किसी भी अभ्यर्थी के शैक्षणिक अंक, अनुभव अंक अथवा कुल वेटेज अंक का उल्लेख नहीं किया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि वेटेज के आधार पर मेरिट तैयार की गई है तो सभी अभ्यर्थियों के अंक सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे, ताकि चयन और अपवर्जन का आधार स्पष्ट हो सके।
आरक्षण नियमों के पालन पर भी सवाल
अभ्यर्थियों का आरोप है कि कैटेगरीवार इंटरव्यू सूची के परीक्षण में सामान्य वर्ग की सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों से अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थियों को ओबीसी, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की सूची में रखा गया है। उनका कहना है कि पहले सभी अभ्यर्थियों की संयुक्त मेरिट सूची तैयार कर सामान्य वर्ग के पद भरे जाने चाहिए थे, इसके बाद आरक्षण नियमों के अनुसार अन्य वर्गों की सूची तैयार की जानी चाहिए थी।
श्रेणी परिवर्तन पर उठे प्रश्न
अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि ओबीसी वर्ग की इंटरव्यू सूची में शामिल नंदलाल पटेल का नाम प्रोविजनल सूची में सामान्य वर्ग में था, जबकि अंतिम सूची में उन्हें ओबीसी वर्ग में शामिल कर दिया गया। दावा-आपत्तियों की सूची में भी श्रेणी परिवर्तन संबंधी कोई दावा दिखाई नहीं देता। ऐसे में अभ्यर्थियों ने श्रेणी परिवर्तन का आधार सार्वजनिक करने की मांग की है।
अनुभव अंकों में पारदर्शिता का अभाव
अभ्यर्थियों का कहना है कि दावा-आपत्तियों के बाद कई उम्मीदवारों को अतिरिक्त अनुभव अंक दिए गए, लेकिन संशोधित अनुभव अंकों की अलग सूची जारी नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि अनुभव प्रमाणपत्र स्वीकार किए गए थे तो संशोधित अंक सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे, ताकि अन्य अभ्यर्थी भी आवश्यक होने पर दावा-आपत्ति प्रस्तुत कर सकें।
शुभम कुमार गुप्ता का मामला भी चर्चा में
ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थी शुभम कुमार गुप्ता (यूजर आईडी–CGDME4LB8NQ) का कहना है कि एम.एससी. नर्सिंग में उनके 74.54 प्रतिशत तथा बी.एससी. नर्सिंग में 64.25 प्रतिशत अंक होने के बावजूद उनका नाम इंटरव्यू सूची में शामिल नहीं किया गया। उनका दावा है कि सामान्य वर्ग की सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रतिशत उनसे कम हैं, फिर भी उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। उनका कहना है कि यदि अनुभव अंक जोड़े गए हैं तो उनका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
अभ्यर्थियों ने समस्त शैक्षणिक योग्यता, अनुभव प्रमाणपत्र एवं पात्रता का पुनः परीक्षण कर संशोधित प्रोविजनल सूची जारी करने, पुनः दावा-आपत्तियां आमंत्रित करने, सभी अभ्यर्थियों के शैक्षणिक अंक, अनुभव अंक एवं कुल वेटेज अंक सहित संशोधित मेरिट सूची प्रकाशित करने तथा बी.एससी. एवं एम.एससी. नर्सिंग के अंकों के आधार पर मेरिट निर्धारण की स्पष्ट नीति जारी करने की मांग की है। साथ ही, यदि सीमित संख्या में अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाने का निर्णय लिया गया है तो उसका वैधानिक आधार सार्वजनिक करने अथवा सभी पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर देने की मांग भी की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत, अब आंदोलन की तैयारी
अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और विसंगतियों की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं स्वास्थ्य मंत्री से भी की है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच प्रारंभ की गई है और न ही भर्ती प्रक्रिया में उठाई गई आपत्तियों एवं विसंगतियों पर विभाग की ओर से कोई पारदर्शी स्पष्टीकरण दिया गया है।
इसी के विरोध में बुधवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी स्वास्थ्य संचालनालय पहुंचे हैं। यहां अभ्यर्थी विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें और आपत्तियां रख रहे हैं। इसके बाद सभी अभ्यर्थी आपस में चर्चा कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो वे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। इसके तहत स्वास्थ्य मंत्री एवं मंत्रालय का घेराव सहित अन्य लोकतांत्रिक आंदोलनों की रूपरेखा भी तय की जा सकती है।












