आयुष्मान हितग्राहियों से नगद रकम लेने, बिना रसीद भुगतान और दोहरी वसूली की शिकायत, उच्च स्तरीय जांच की मांग
छत्तीसगढ़/कोरबा :- शहर के रजगामार रोड स्थित श्वेता हॉस्पिटल पर आयुष्मान भारत योजना के नाम पर अवैध वसूली और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में पीड़ित परिवार ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सहित शासन के संबंधित अधिकारियों से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी पत्नी श्रीमती अमृता का उपचार 6 मार्च से 11 मार्च 2026 तक श्वेता हॉस्पिटल में हुआ था। उपचार के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा बताया गया कि इलाज आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। इस दौरान हितग्राही के मोबाइल पर योजना से संबंधित संदेश भी प्राप्त हुए, जिनमें उपचार राशि स्वीकृत होने की जानकारी दर्ज थी।
इसके बावजूद अस्पताल द्वारा मरीज के परिजनों से अतिरिक्त नगद राशि वसूली गई। आरोप है कि ली गई रकम का समुचित बिल अथवा रसीद नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, भुगतान अस्पताल के नाम से न लेकर अन्य नाम और क्यूआर कोड के माध्यम से लिया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल परिसर में अन्य आयुष्मान हितग्राहियों एवं उनके परिजनों से भी नगद राशि ली जा रही थी तथा अलग रजिस्टर में उसकी प्रविष्टियां की जा रही थीं। इस संबंध में फोटो साक्ष्य होने का दावा भी किया गया है। आरोप है कि अस्पताल द्वारा आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क उपचार दर्शाकर समानांतर रूप से नकद वसूली की जा रही थी।
मामले में आवेदक द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी प्राप्त की गई है। प्राप्त दस्तावेजों में उपचार संबंधी अपलोड रिकॉर्ड, दावा अभिलेख और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों एवं परिस्थितियों से गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बनती है।
शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें
- श्वेता हॉस्पिटल के खिलाफ आयुष्मान योजना अंतर्गत विशेष जांच और लेखा परीक्षण कराया जाए।
- अस्पताल द्वारा प्रस्तुत दावों, अपलोड बिलों, पैकेज विवरण और वास्तविक मरीज भुगतान का मिलान कर जांच की जाए।
- अस्पताल परिसर में रखे गए नगद वसूली रजिस्टर, रसीद रिकॉर्ड और क्यूआर भुगतान विवरण जब्त कर परीक्षण किया जाए।
- पीड़ित अमृता के मामले में ली गई राशि की जांच कर अवैध वसूली वापस कराई जाए।
- अन्य प्रभावित हितग्राहियों की पहचान कर उनकी राशि वापसी सुनिश्चित की जाए।
- जांच पूर्ण होने तक आवश्यकतानुसार दावा भुगतान रोका जाए।
- दोष सिद्ध होने पर अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने, सूची से हटाने एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।
मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और आयुष्मान योजना से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि शिकायत पर प्रशासन कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।













