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रेत माफिया पर सख्ती के संकेत: अवैध खनन पर कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्टर होंगे जिम्मेदार

सचिव पी. दयानंद की दो टूक—रेत आपूर्ति में कमी बर्दाश्त नहीं, सीएम के निर्देशों की अनदेखी पर होगी सीधी कार्रवाई

छत्तीसगढ़/रायपुर :- छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध रेत खनन के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब जिला प्रशासन की जवाबदेही तय की जा रही है। खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी जिले में अवैध खनन पाया गया, तो संबंधित कलेक्टर और खनिज अधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे।
खनिज सचिव ने प्रदेश के 11 प्रमुख रेत आपूर्ति जिलों—रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, सक्ती, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर, बलरामपुर और कांकेर—के कलेक्टरों के साथ वर्चुअल बैठक कर खदान संचालन और रेत आपूर्ति की समीक्षा की।
बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रदेश में रेत की कमी किसी भी हाल में नहीं होनी चाहिए। सभी स्वीकृत खदानों से उनकी क्षमता के अनुरूप उत्पादन सुनिश्चित कर आम जनता को उचित दरों पर रेत उपलब्ध कराई जाए। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रॉयल्टी मुक्त रेत उपलब्ध कराने के आदेशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया, ताकि इस योजना की आड़ में कोई अवैध गतिविधि न पनप सके।
नीलामी में लापरवाही पर नाराजगी
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा में 100 प्रतिशत से अधिक खदानों की नीलामी हो चुकी है, जबकि धमतरी, बिलासपुर और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर जिले अपेक्षित प्रगति से पीछे हैं। इस पर सचिव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित कलेक्टरों को जल्द से जल्द नीलामी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
साथ ही नीलाम खदानों की खनन योजना और पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूरा करने तथा इसकी साप्ताहिक समीक्षा करने को कहा गया।
जीरो टॉलरेंस नीति पर सख्ती
राज्य सरकार अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। सचिव दयानंद ने स्पष्ट किया कि जिन जिलों में केंद्रीय उड़नदस्ता को कार्रवाई करनी पड़ रही है, वह सीधे तौर पर जिला प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि अवैध खनन वाले क्षेत्रों का चिन्हांकन कर लगातार कार्रवाई की जाए और शिकायतों व मीडिया रिपोर्ट्स को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ड्रोन सर्वे से होगी निगरानी, तय होगी जिम्मेदारी
बैठक के अंत में सचिव ने दो टूक कहा कि यदि किसी जिले में ड्रोन सर्वे या उड़नदस्ता जांच में अवैध उत्खनन के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित कलेक्टर और खनिज अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।
प्रदेश में रेत आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के साथ-साथ अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए सरकार अब सीधे जिला प्रशासन को जवाबदेह बना रही है। ऐसे में आने वाले समय में रेत माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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