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बिना नंबर प्लेट दौड़ रही जिला पंचायत CEO की इनोवा गाड़ी, सामान्य दौरों में भी नियम विरुद्ध आपातकालीन बत्ती का इस्तेमाल

छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले में जहां एक ओर आम जनता के वाहन नियमों के उल्लंघन पर पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों पर ही नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं। कोरबा जिला पंचायत के CEO दिनेश नाग की फोर व्हीलर गाड़ी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आरोप है कि उनकी गाड़ी बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रही है।

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सूत्रों के अनुसार, संबंधित वाहन के आगे और पीछे नंबर प्लेट नहीं लगी है और यह स्थिति पिछले कई महीनों से बनी हुई है। जबकि वर्तमान नियमों के अनुसार, वाहन शोरूम से निकलने से पहले ही उसका पंजीयन नंबर जारी कर दिया जाता है। ऐसे में बिना नंबर प्लेट के वाहन का संचालन नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।     

सामान्य दौरों में आपातकालीन (एम्बर) बत्ती का इस्तेमाल, नियमों पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, उक्त वाहन में सामान्य प्रशासनिक दौरों के दौरान भी एम्बर (पीली) बत्ती का उपयोग किया जा रहा है। जबकि नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि इस प्रकार की बत्ती का उपयोग केवल आपातकालीन परिस्थितियों — जैसे आपदा प्रबंधन, कानून-व्यवस्था या विशेष सरकारी कार्यों के दौरान ही किया जा सकता है।   

 सूत्रों का दावा: टेंपरेरी नंबर भी नहीं कराया जमा

कार एजेंसियों से जुड़े सूत्रों की मानें तो यदि कोई व्यक्ति दूसरे राज्य से वाहन खरीदकर अपने राज्य में पंजीयन कराना चाहता है, तो उसे एक अस्थायी (टेंपरेरी) नंबर प्रदान किया जाता है, जिसकी वैधता सामान्यतः लगभग एक सप्ताह तक होती है। इस अवधि के भीतर वाहन मालिक को संबंधित आरटीओ में आवश्यक दस्तावेज जमा कर स्थायी पंजीयन प्रक्रिया पूरी करनी होती है।     

लेकिन सूत्रों के मुताबिक, जिला पंचायत CEO की इनोवा गाड़ी, जो कमर्शियल उपयोग में बताई जा रही है, कई दिनों से बिना नंबर प्लेट के ही संचालित हो रही है। इतना ही नहीं, आरटीओ में टेंपरेरी पंजीयन से जुड़े दस्तावेज भी अब तक जमा नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद वाहन का उपयोग जारी है, जो नियमों के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा करता है।       

किन्हें है आपातकालीन बत्ती के उपयोग की अनुमति

नियमों के अनुसार, आपातकालीन बत्ती (एम्बर/पीली) का उपयोग सीमित श्रेणी के अधिकारियों और सेवाओं को ही विशेष परिस्थितियों में दिया गया है। आमतौर पर आपदा प्रबंधन, राजस्व, लोक निर्माण, बिजली, या कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारी ड्यूटी के दौरान इसका उपयोग कर सकते हैं, वह भी तभी जब वे वास्तव में आपातकालीन कार्य में लगे हों।
वहीं एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस जैसे आपातकालीन सेवाओं को विशेष प्राथमिकता के तहत बत्ती उपयोग की अनुमति दी गई है। स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सामान्य प्रशासनिक दौरों, निजी उपयोग या नियमित निरीक्षण के दौरान इस प्रकार की बत्ती का उपयोग अनुचित माना जाता है।

वीआईपी कल्चर पर पहले ही लग चुकी है रोक

देश में वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 19 अप्रैल 2017 को बड़ा निर्णय लेते हुए सभी सरकारी वाहनों से लाल बत्ती हटाने का फैसला किया था, जो 1 मई 2017 से पूरे देश में लागू हो गया। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यह कदम उठाया गया था, ताकि बत्ती के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।

नियमों के उल्लंघन और पद के दुरुपयोग पर सवाल

एक ओर आम नागरिकों पर सख्ती और दूसरी ओर अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना नंबर प्लेट वाहन संचालन, टेंपरेरी पंजीयन प्रक्रिया का पालन न करना और सामान्य दौरों में आपातकालीन बत्ती का उपयोग — ये सभी पहलू न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि इसे पद के दुरुपयोग के रूप में भी देखा जा सकता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में क्या संज्ञान लेते हैं और क्या कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।

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