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चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ: मां सर्वमंगला मंदिर में जले आस्था के हजारों दीप, भक्तिमय हुआ वातावरण

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7200 तेल और 750 घृत के दीपों से सजा मंदिर परिसर, देश-विदेश के श्रद्धालुओं ने दूर रहकर भी अर्पित की आस्था

छत्तीसगढ़/कोरबा :- हिंदू धर्म के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज से पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हो गई। औद्योगिक नगरी कोरबा स्थित प्राचीन और प्रसिद्ध मां सर्वमंगला मंदिर में इस अवसर पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जहां हजारों दीपों की रोशनी से पूरा मंदिर परिसर आलोकित हो उठा।       

नवरात्रि के प्रथम दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। राजपुरोहित पंडित नमन पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष मंदिर में 7200 तेल के दीप और 750 घृत के दीप प्रज्वलित किए गए हैं। विशेष बात यह रही कि देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं ने भी अपनी आस्था व्यक्त करते हुए मंदिर में दीप जलवाए, जिससे उनकी श्रद्धा भी इस आयोजन से जुड़ सकी।

विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए नन्हा पांडे ने दीप प्रज्वलित कर नवरात्रि पर्व का शुभारंभ किया। इस दौरान मंदिर परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा और भक्तों का सैलाब दर्शन के लिए उमड़ पड़ा।

प्राचीन मां सर्वमंगला मंदिर का गौरव

मां सर्वमंगला मंदिर कोरबा की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह मंदिर प्राचीन काल से क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजित है। मान्यता है कि मां सर्वमंगला स्वयं यहां विराजमान होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली और वर्षों पुरानी परंपराएं इसकी ऐतिहासिक गरिमा को दर्शाती हैं। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और यह स्थल भक्ति का विशाल केंद्र बन जाता है।

चैत्र नवरात्रि का धार्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का विशेष समय होता है, जिसमें भक्त उपवास रखकर शक्ति की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा की भक्ति करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।

भंडारे का विशेष आयोजन

नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक मंदिर प्रांगण में भक्तों के द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। श्रद्धालु माता के दरबार में प्रसाद स्वरूप भोजन वितरण कर सेवा भाव का परिचय देते हैं। इस दौरान दूर-दूर से आने वाले भक्त भी भंडारे में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे यहां सामाजिक और धार्मिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम

मंदिर में दीपों की जगमगाहट और भक्तों की श्रद्धा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित सभी वर्गों के लोगों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। नवरात्रि के पहले दिन ही जिस प्रकार श्रद्धालुओं का उत्साह देखने को मिला, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले नौ दिनों तक मां सर्वमंगला मंदिर आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।