छत्तीसगढ़/कोरबा :- कहते हैं राजनीति में ना कोई अपना ना कोई पराया होता है, कुर्सी की चाहत में अपने भी पराए हो जाते हैं और पराए भी अपने हो जाते हैं,
13 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री को हाई कमान द्वारा टिकट लिस्ट फाइनल होने के पहले अचानक दिल्ली बुलावा कई प्रश्नों को जन्म दे रहा है और राजस्व मंत्री के बढ़ते कद की ओर इशारा कर रहा है वही प्रदेश की राजनीति में आगामी उतार-चढ़ाव के संकेत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है,
हालांकि हाई कमान द्वारा राजस्व मंत्री को दिल्ली बुलाने के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि राजस्व मंत्री चयन समिति के सदस्य हैं और यह प्रदेश के कई सीटों में अच्छी पैठ रखते हैं फाइनल टिकट की लिस्ट लगभग बनकर तैयार है और कुछ जगहो में टिकट को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है जिसे सुलझाने राजस्व मंत्री और कई दिग्गजों को हाई कमान ने दिल्ली बुलाया है,
जबकि प्राप्त सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के राजनीति में आगामी काफी उलट फेर की संभावना जताई जा रही है जिसके कारण कांग्रेस हाई कमान की ओर से बहुत ही सावधानी के साथ आगामी रणनीति बनाई जा रही है जिससे विपक्ष पार्टी को प्रदेश में सत्ता पाने का मौका ना मिल सके, जैसे कि कुछ प्रदेशों में देखा गया है कि बीजेपी की कम सिम होने के बावजूद भी वहां बीजेपी सफल रणनीति के कारण सरकार बनाने में सफल रही, इन्हीं सब बातों को लेकर कांग्रेस हाई कमान काफी गंभीर है और टिकट वितरण में काफी फूंक कर कदम उठाए जा रहे हैं,
प्रदेश में जहां कांग्रेस की भूपेश सरकार 5 साल राज किया जिन्होंने छत्तीसगढ़िया वाद को आगे बढ़ते हुए जनता में एक पैठ जमाई, लेकिन सरकार के ढाई वर्ष के कार्यकाल के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी में उपजे ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री की अंतर्कलह आज भी दिग्गजों के समर्थकों में अंदर ही अंदर पनप रही है, जिससे पार्टी को नुकसान पहुंच सकता है इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस हाई कमान कोई भी मौका विपक्ष को नहीं देना चाह रही है जिससे पार्टी को प्रदेश में सरकार बनाने में कोई कठिनाई हो, पार्टी के सभी पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं को नसीहत दी जा रही है कि सभी एकजुट होकर प्रदेश में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनाएं,
लेकिन ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री के वादे की कसक टीएस सिंहदेव के समर्थकों और कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर कचोट रही है, हालांकि वरिष्ठ कांग्रेसी नेता टीएस सिंहदेव को चुनाव के ऐन वक्त पहले उन्हें छत्तीसगढ़ का उपमुख्यमंत्री हाई कमान द्वारा बनाकर ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री के विवाद का पटाक्षेप करने की कोशिश की गई, और उन्हें लॉलीपॉप पकड़ा दिया गया लेकिन कार्यकर्ता भूल नहीं पा रहे हैं,
दिल्ली से लेकर प्रदेश भर के नेताओं की निगाहें कोरबा विधानसभा क्षेत्र पर
छत्तीसगढ़ के राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल कोरबा विधानसभा सीट से तीन पंचवर्षीय चुनाव में जीत हासिल करते हुए आए हैं 15 वर्ष छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार रहने के बाद भी कोरबा विधानसभा सीट से कांग्रेस ने ही बाजी मारी और छत्तीसगढ़ बनने के बाद लगातार 15 वर्षों तक जयसिंह अग्रवाल इस सीट से विजई घोषित होते रहे, वर्तमान में प्रदेश की कांग्रेस सरकार में वह राजस्व मंत्री रहे जिसके कारण उनका कद पार्टी हाई कमान की नजरों और प्रदेश की जनता में काफी बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है यही कारण है कि इन्हें चयन समिति का सदस्य बनाया गया है, माना जा रहा है कि अगर इन्हें पुनः चौथी बार कांग्रेस टिकट देती है और वह जीत हासिल करते हैं तो वह मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार होंगे क्योंकि जयसिंह अग्रवाल राजस्व मंत्री बनने के पहले भी प्रदेश में बीजेपी की सरकार रहने के बावजूद भी बतौर कोरबा विधायक रहते हुए क्षेत्र में अच्छी पकड़ बनाई रखी इन्हीं के रणनीति के कारण नगर पालिक निगम कोरबा में दो पंचवर्षीय से कांग्रेस की सत्ता काबिज है, क्षेत्र में इन्हें सफल रणनीतिकार भी माना जाता है हालांकि होने वाले इस विधानसभा चुनाव में कोरबा विधानसभा सीट से कांग्रेस के गढ़ में सेंध मारने बीजेपी ने लखन लाल देवांगन को कोरबा विधानसभा सीट से प्रत्याशी उतारा है लखन लाल देवांगन की छवि एक सीधे-साधे और लोकल वासी के रूप में बनी हुई है जो इस चुनाव में जनबल और धनबल की लड़ाई मानकर चुनाव में आगे बढ़ रहे हैं पूर्व में कोरबा नगर पालिक निगम के महापौर भी रह चुके हैं और बीजेपी की सरकार में संसदीय सचिव रहे हैं इनको भी चुनाव में जीत को हर और हर को जीत में बदलने का सफल रणनीतिकार मान जाता है, यही कारण है कि दिल्ली से लगाकर प्रदेश के नेताओं की नजर कोरबा विधानसभा क्षेत्र में लगी हुई है, अगर यहां से भाजपा के प्रत्याशी विजई हुए तो छत्तीसगढ़ बनने के बाद भाजपा के लिए पहला मौका होगा जहां से उनका प्रत्याशी जीतेगा और अगर कांग्रेस से जयसिंह अग्रवाल को यहां से टिकट मिलती है और वह जीत हासिल करते हैं तो चौथी बार जीतने के बाद वह मुख्यमंत्री के दावेदारों में से एक होंगे, जहां जयसिंह अग्रवाल को अपना वर्चस्व और आगे की राजनीति के लिए जीतना बेहद जरूरी है वही बीजेपी के प्रत्याशी लखन लाल देवांगन को इस सीट से जीतकर बीजेपी आला कमान के नजरों में खरा उतरना और उनके भरोसे पर पक्का साबित होना जरूरी है ।
ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री का मामला कांग्रेस का बिगाड़ सकता है समीकरण
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाई कमान होने वाले विधानसभा चुनाव में अबकी बार पूर्व की तरह ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री के जैसे मामले को सुलझाते हुए आगामी परिस्थितियों से निपटने रणनीति बना रही है, अगर 2023 के चुनाव में कांग्रेस को जनता का आशीर्वाद मिलता है तो हाई कमान प्रदेश पार्टी के नेताओं के आपसी मनमुटाव खत्म कर कांग्रेस की सरकार बनाना चाह रही है और विपक्ष को किसी प्रकार का मौका नहीं देना चाह रही है, हाई कमान को आशंका बनी हुई है कि अगर प्रदेश के नेताओं की आपसी मतभेद को नहीं मिटाया गया तो बीजेपी इसका लाभ उठा सकती है जिससे निपटने के लिए पार्टी द्वारा बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जा रही है ऐसे में प्रदेश भर के वरिष्ठ नेताओं सफल रणनीतिकारों से चर्चा करते हुए फाइनल टिकट की लिस्ट बनाई जा रही है, कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिलती है तो बीजेपी दूसरे राज्यों की भांति उस पर सेंध ना मरने पाए इस पर भी खासा ध्यान रखा जा रहा है, और मुख्यमंत्री के चेहरा बदलने के विवाद उठने की स्थिति पर हाई कमान काफी गंभीर बना हुआ है और उस स्थिति से निपटने के लिए बीच का रास्ता या फिर मुख्यमंत्री पद के लिए नया चेहरा जो प्रदेश की कमान संभालते हुए सफलतापूर्वक प्रदेश की सत्ता चला सके इस पर भी कांग्रेस हाई कमान गंभीर बना हुआ है ।
हालांकि छत्तीसगढ़ में पुन: वर्तमान में भूपेश बघेल ही कांग्रेस से मुख्यमंत्री के चेहरे हैं, इस मामले पर जब सुर्खियां न्यूज़ ने कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से बात करना चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, वही बीजेपी में डॉक्टर रमन सिंह, अरुण साव, बृजमोहन अग्रवाल सहित कई मुख्यमंत्री के दावेदारों में चेहरे हैं हालांकि भाजपा ने अभी मुख्यमंत्री के दावेदार का चेहरा उजागर नहीं किया है, और वह कमल के फूल जो पार्टी का चुनाव चिन्ह है उसी के दम पर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रही है, इस मामले पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव से दूरभाष द्वारा संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन मीटिंग में होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पाया, वहीं छत्तीसगढ़ में तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष कोमल उपेन्डी से सुर्खियां न्यूज़ ने बात की तो उन्होंने कहा कि अभी हमारी पार्टी में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है, ।
छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य प्रदेश फिर भी आज तक आदिवासी मुख्यमंत्री का चेहरा कोई भी पार्टी ने नहीं किया घोषित
बताते चलें छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य प्रदेश है जहां राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों में पहाड़ी कोरवा, बिरहोर, बैगा, कमार और अबूझमाड़ियों के अलावा अनेक आदिवासी पिछड़ी जातियां हैं जिसमें से गोंड़, हलबा, कमार, भुंजिया, अगरिया, बैगा, कोंध, सवरा, कंवर, पारधी, बिंझवार, धनवार, सौंता, भैना, परधान आदि जनजातियां निवास करते हैं, लेकिन आज तक छत्तीसगढ़ के गठन के बाद इन आदिवासी पिछड़ी जन जातियों में से कोई भी पार्टी ने अपने शपथ पत्र में आदिवासी मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा नहीं की हालांकि समय-समय पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग उठती रही है लेकिन पर्टियों के प्रभाव के कारण पार्टी में मौजूद आदिवासी नेता होने के बावजूद भी चुप्पी साधे रहे, जहां राष्ट्रीय पार्टियां सामाजिक कार्ड खेलते हुए विभिन्न समाजों को टुकड़ों टुकड़ों में बांंटकर राजनीति करती आ रही है वही आदिवासी बाहुल्य प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री की घोषणा पर क्यों चुप्पी साधे हुई हैं, 2023 के विधानसभा चुनाव में आदिवासी मुख्यमंत्री की मांग पर भी राजनीति गर्म रहने वाली है जिसके कारण बीजेपी और कांग्रेस दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के समीकरण बिगड़ सकते हैं वही तीसरे विकल्प के रूप में उभर रही आम आदमी पार्टी सहित गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ अनेक स्थानीय पार्टियों को इसका लाभ मिल सकता है ।


















