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बालको के G9 प्रोजेक्ट पर राजस्व मंत्री की शिकायत सही  या डीएफओ द्वारा निर्माण कार्य पर रोक के आदेश और फिर उद्योग मंत्री का मामले पर क्लीन चिट कौन सही कौन गलत चर्चाओं का दौर

G-9 प्रोजेक्ट पर वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल, पूर्व मंत्री की शिकायत पर रोक, उद्योग मंत्री बोले—‘अनुमति के बाद शुरू हुआ था काम’

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  वेदांता कंपनी के बालको क्षेत्र में निर्माणाधीन G-9 मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट पर वन विभाग की अचानक रोक ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल की शिकायत के आधार पर जिला वन अधिकारी (DFO) प्रेमलता यादव ने निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश जारी किए, लेकिन इस कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं।       

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पूर्व मंत्री का आरोप—सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण, पेड़ों की कटाई भी की गई

जयसिंह अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में आरोप लगाया कि G-9 प्रोजेक्ट शासकीय मद की भूमि पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने मूल्यवान वृक्षों की अवैध कटाई का आरोप लगाते हुए छह बिंदुओं में विस्तृत जांच और कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, यह पूरा प्रोजेक्ट नियमों को दरकिनार कर आगे बढ़ाया जा रहा है।

भूमि पूजन के कुछ दिन बाद ही रोक—राजनीति गरमाई

कुछ दिन पहले ही इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री लखनलाल देवांगन और महापौर संजू देवी राजपूत ने किया था। उसके कुछ ही दिनों बाद वन विभाग द्वारा रोक लगाने की कार्रवाई ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है।

वन विभाग की चुप्पी से बढ़े सवाल

DFO प्रेमलता यादव द्वारा निर्माण रोकने का पत्र जारी होने के बाद प्रोजेक्ट का काम बंद हो गया। मीडिया ने जब उनका पक्ष जानने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन रिसीव किया। विभागीय चुप्पी से कई तरह की चर्चाएँ और संदेह तेज हो गए हैं—क्या रोक कार्रवाई तथ्यों के आधार पर हुई, या राजनीतिक दबाव में?

उद्योग मंत्री का जवाब—‘काम नहीं रुका, वन विभाग से मिली थी मंजूरी’

उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने वन विभाग की कार्रवाई पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा—
“बालको का कोई भी निर्माण कार्य रोका नहीं गया है। भूमि पूजन मैंने इसलिए किया क्योंकि निर्माण कार्य वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद ही शुरू किया गया था। अगर DFO ने रोक आदेश जारी किया है, तो इसका जवाब वही देंगी।”

मंत्री की इस प्रतिक्रिया के बाद पूरा मामला और तेज हो गया है। अब राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि—क्या वन विभाग की कार्रवाई सही थी, या प्रोजेक्ट को लेकर विभागीय समन्वय की भारी कमी उजागर हुई है?

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