छत्तीसगढ़/कोरबा :- लगभग दो वर्ष पुराने चर्चित हत्या प्रकरण में फरार चल रहे मुख्य आरोपी वैभव भारती को थाना उरगा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे एक दिन पहले सह-आरोपी जितेंद्र मसीह की गिरफ्तारी हुई थी। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर जिला पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा ₹5,000 का पुरस्कार घोषित किया गया था। शनिवार को मुख्य आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत पुलिस अधीक्षक के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं नगर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में की गई। थाना उरगा पुलिस लंबे समय से दोनों फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी।
पुरानी रंजिश बनी हत्या की वजह
पुलिस विवेचना में सामने आया कि मृतक विकास अग्रवाल और मुख्य आरोपी वैभव भारती के बीच पुराना विवाद एवं रंजिश थी। आरोपी को संदेह था कि मृतक उसकी बहन पर गलत नजर रखता है। इसी रंजिश के चलते उसने अपने साथी जितेंद्र मसीह के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची और मृतक को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
शादी समारोह में शराब में मिलाया गया जहर
पुलिस के मुताबिक, 16 फरवरी 2024 को एक शादी समारोह के दौरान दोनों आरोपियों ने पहले मृतक को अत्यधिक शराब पिलाई। इसके बाद दुकान से चूहा मारने की जहरीली दवा लाकर शराब में मिला दी और डिस्पोजेबल गिलास के माध्यम से उसे पिला दिया। कुछ देर बाद मृतक की तबीयत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में जहरीले पदार्थ की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर सूचना से मिली सफलता
घटना के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। 31 जुलाई 2026 को सह-आरोपी जितेंद्र मसीह की गिरफ्तारी के बाद मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर 1 अगस्त 2026 को मुख्य आरोपी वैभव भारती को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए अपना मेमोरेंडम कथन भी दिया।
दोनों आरोपी अब न्यायिक प्रक्रिया में
लगभग दो वर्ष तक फरार रहने के बाद अब इस चर्चित हत्या प्रकरण के दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस का कहना है कि सतत निगरानी, वैज्ञानिक विवेचना, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर तंत्र की मदद से इस मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही मामले की न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है।












