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SECL गेवरा क्षेत्र में मुआवजे के लिए हाहाकार, बेघर हुए ग्रामीणों ने दी अनिश्चितकालीन धरना और उग्र आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़/कोरबा :-साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत अमगांव के भू-विस्थापितों ने मुआवजा भुगतान में हो रही देरी और प्रबंधन की संवेदनहीनता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है वर्षों पहले जमीन और मकान अधिग्रहित किए जाने के बावजूद आज भी दर्जनों परिवार अपनी जायज राशि के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं ।

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प्रमुख मुद्दे और विस्थापितों का दर्द

​विभिन्न आवेदनों के माध्यम से विस्थापितों ने अपनी व्यथा सामने रखी है:-
०१. ​भुगतान में अकारण देरी:- ललित कुमार जैसे प्रभावितों का कहना है कि उनकी संपत्तियों का अर्जन हो चुका है लेकिन पिछले 6 महीनों से मुआवजे की राशि बिलासपुर मुख्यालय स्तर पर अकारण रोकी गई है इससे परिवारों के सामने भरण-पोषण और आर्थिक संकट की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है ।
०२. ​न्याय के लिए पिता का संघर्ष:- ग्राम अमगांव के ही जोहनराम निर्मलकर ने बताया कि उनकी दिवंगत पुत्री स्व. लता के नाम पर निर्धारित मुआवजा राशि 3 साल बीत जाने के बाद भी नहीं मिली है उन्होंने घोषणा की है कि यदि समाधान नहीं हुआ तो वे 11 अप्रैल 2026 से अपने पूरे परिवार के साथ मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे ।
०३. ​रोहिदास मोहल्ला के साथ भेदभाव का आरोप:- ग्राम अमगांव के रोहिदास मोहल्ला निवासी बसंती चैतराम समरू और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूरे गांव का पुनर्वास और मुआवजा हो चुका है लेकिन दलित वर्ग के इस समूह को जानबूझकर उपेक्षित रखा जा रहा है 2023 में मूल्यांकन होने के बावजूद उन्हें आज तक लाभ नहीं मिला है ।

आर-पार की लड़ाई का ऐलान

​विस्थापितों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि प्रबंधन का रवैया न केवल संवेदनहीन है बल्कि अन्यायपूर्ण भी है कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद भी राशि रोकना उनकी मानसिक प्रताड़ना का कारण बन रहा है ।

​हमने बार-बार गुहार लगाई लेकिन प्रबंधन की उदासीनता खत्म नहीं हो रही अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है यदि शीघ्र भुगतान नहीं हुआ तो होने वाले उग्र आंदोलन और किसी भी अप्रिय स्थिति की समस्त जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी ।

प्रभावित ग्रामीण ललित कुमार जोहनराम व अन्य
​विस्थापितों ने अपनी शिकायतों की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पाली और पुलिस प्रशासन को भी भेज दी है अब देखना यह है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन इन गरीबों की सुध लेता है या आंदोलन की आग और भड़कती है ।

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