छत्तीसगढ़/कोरबा :- राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर जहां आदिवासी संस्कृति और गौरव को सम्मान देने की बात होती है, वहीं कोरबा जिले में आयोजित कार्यक्रम में हुई गंभीर लापरवाही ने पूरे आयोजन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला आदिवासी विकास विभाग द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में ग्रामीण अंचलों से आए आदिवासी कलाकारों, बच्चों और बुजुर्गों को जिस तरह मालवाहक वाहनों में ठूंस-ठूंसकर लाया गया, उससे व्यवस्था की वास्तविकता उजागर हो गई। 
मालवाहक वाहन बने ‘यात्री बस’ — 85 लोग दो पिकअप में, 50 लोग बोलेरो व पिकअप में!
सूत्रों के अनुसार एक पंचायत से 85 लोगों को सिर्फ दो पिकअप में भेजा गया। वहीं दूसरी ओर लगभग 50 लोगों को एक बोलेरो और एक पिकअप में बैठाकर 40–60 किलोमीटर दूर से कार्यक्रम स्थल तक लाया गया।
यह भी बताया जा रहा है कि जिले के पांचों ब्लॉकों से आए 22 सांस्कृतिक दल भी क्षमता से अधिक भरी गाड़ियों में पहुंचे। इन वाहनों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल थे, जो किसी भी दुर्घटना की स्थिति में गंभीर जोखिम में पड़ सकते थे। 
आयोजन की सुरक्षा तैयारियां पूरी तरह फेल?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े आयोजन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बेहद चिंताजनक है।
सवाल यह है कि —
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यदि रास्ते में कोई हादसा हो जाता तो?
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जिम्मेदारी किसकी तय होती — आयोजन समिति, जिला प्रशासन या आदिवासी विकास विभाग?

मुख्य अतिथि रहे राज्य के उद्योग एवं श्रम मंत्री
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। मंच पर कार्यक्रम भले ही सफल रहा, लेकिन मंच के पीछे यात्रियों के साथ हुई यह लापरवाही विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें
घटना सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्तव्यों में चूक करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।
सम्मान के नाम पर असुरक्षित सफर — क्या यही है आदिवासियों का गौरव?
जनजातीय गौरव दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर ऐसी लापरवाही न केवल कार्यक्रम की भावना को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह दर्शाती है कि अभी भी आदिवासी समुदाय के सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीरता का अभाव है।
















