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कोरबा में सम्पन्न हुआ 9 दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव गुरुवर श्री शंभू शरण लाटा जी के अमृतमय प्रवचनों ने बांधा आध्यात्मिक समा

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  शहर की पीली कोठी परिसर में 21 नवंबर से 29 नवंबर तक आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा का आज हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। श्रद्धा गुरुवर श्री शंभू शरण लाटा जी के दिव्य वाणी से सजी इस कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचे और प्रभु श्रीराम के आदर्श जीवन की अमृतमयी शिक्षाओं का श्रवण किया।कथा आयोजन में कोरबा वासियों ने सक्रिय योगदान दिया, जबकि मुख्य आयोजक के रूप में रितेश गुप्ता, कैलाश गुप्ता, दीपक अग्रवाल, आशीष बत्रा और महेश अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।     

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दिव्य प्रसंगों ने बांधा समा

9 दिनों तक चली कथा में संत लाटा जी ने अत्यंत सरल, मार्मिक और आध्यात्मिक शैली में— राम जन्मोत्सव, सीता-विवाह, शिव-विवाह, पुष्पवाटिका प्रसंग, केवट संवाद, श्रवण कुमार, भरत चरित्र, सीता हरण, राम वनवास और शबरी प्रसंग—का अद्भुत वर्णन किया। हर प्रसंग पर पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने बार-बार “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ कथा का आनंद लिया।   

राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों ने भी लिया आशीर्वाद

कथा पंडाल में जिले की कई गणमान्य हस्तियों ने भी पहुंचकर गुरुवर लाटा जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। इनमें—
कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन, कोरबा नगर निगम अध्यक्ष संजू देवी राजपूत, भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल, राम सिंह अग्रवाल, योगेश जैन तथा लाइंस क्लब के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। इन सभी ने कथा आयोजन की सराहना की और इसे कोरबा के लिए आध्यात्मिक उत्सव बताया।   

संत लाटा जी का आध्यात्मिक व्यक्तित्व

पंडित श्री शंभू शरण लाटा जी का जन्म कोलकाता में हुआ। उनके पिता पंडित दुर्गादत्त लाटा और दादा पंडित जमुनाघर लाटा न्यायशास्त्र एवं भागवत पुराण के प्रसिद्ध विद्वान थे।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज से दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात तथा संत मुरारी बापू की कथा सुनने के बाद उन्हें रामकथा सेवा की प्रेरणा मिली। आज भी वे निस्वार्थ भाव से कथा का आयोजन करते हैं और विशेष बात यह है कि किसी भी कथा में दान-दक्षिणा स्वीकार नहीं करते। उनका संदेश है कि “रामकथा सेवा है, लेन-देन नहीं।” 

कोरबा में बना आध्यात्मिक वातावरण

9 दिनों तक पूरे कोरबा में भक्तिमय माहौल बना रहा। पीली कोठी परिसर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालु आते रहे और कथा श्रवण के साथ भक्ति-संगीत का आनंद लेते रहे। कथा समापन के साथ ही भक्तों ने भविष्य में फिर से ऐसे आयोजन की इच्छा जताई।         

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