छत्तीसगढ़/कोरबा :- राष्ट्रीय राजमार्ग कोरबा–चांपा (NH-149B) पर स्थित जमनीपाली टोल प्लाजा एक बार फिर विवादों में घिर गया है। नियमों के खुले उल्लंघन और आम जनता से जबरन वसूली के गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व जनपद सदस्य झामलाल साहू ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर टोल प्लाजा को तत्काल बंद करने की मांग की है।
श्री साहू ने जमनीपाली टोल प्लाजा को “आमजन से दिनदहाड़े लूट का अड्डा” करार देते हुए कहा कि यह टोल प्लाजा भारत सरकार के शुल्क नियम 2008 का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए संचालित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो जनहित में उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
35 किलोमीटर के भीतर तीन टोल, नियमों का खुला उल्लंघन
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में श्री साहू ने बताया कि NH-149B पर जमनीपाली टोल प्लाजा दो निकटवर्ती टोल प्लाजा के बीच मात्र 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि भारत सरकार के शुल्क नियम 2008 के अनुसार दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी 60 किलोमीटर होना अनिवार्य है।
-
जमनीपाली से उरगा भारतमाला टोल (प्रक्रियाधीन) – 25 किमी
-
जमनीपाली से केसला टोल प्लाजा – 35 किमी
इसके बावजूद टोल का संचालन किया जाना नियमों की खुली अवहेलना है।
स्थानीय वाहन चालकों से अन्याय, ओवरलोड के नाम पर अवैध वसूली
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमनीपाली टोल प्लाजा पर स्थानीय वाहन चालकों को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। ओवरलोड के नाम पर अवैध वसूली विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में की जा रही है। श्री साहू का दावा है कि इस संबंध में ठोस साक्ष्य भी उपलब्ध हैं।
कर्मचारियों के वेतन में भी घोटाला
श्री साहू ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत NHAI द्वारा दी गई जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि—
-
टोल कलेक्टर (TC) का निर्धारित वेतन – ₹19,710
-
सुपरवाइजर का निर्धारित वेतन – ₹23,840
जबकि वास्तविकता में कर्मचारियों को केवल ₹10,000 से ₹12,000 ही दिया जा रहा है। यह न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि भारत सरकार को भ्रामक जानकारी देने का भी गंभीर मामला है।
कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका
भाजपा नेता झामलाल साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि जमनीपाली टोल प्लाजा को शुल्क नियम 2008 के तहत तत्काल पूर्णतः बंद नहीं किया गया और अवैध वसूली पर रोक नहीं लगी, तो वे जनहित में सुप्रीम/उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरण की होगी। 


















