छत्तीसगढ़/कोरबा :- विकास के नाम पर विनाश का खेल लगातार जारी है जहां छत्तीसगढ़ के अलग-अलग वनांचल क्षेत्रों में पेड़ों की बलि चढ़ाकर कोयला खदान खोली जा रही हैं वही विस्तार के नाम पर वैद्य अवैध तरीके से पेड़ों को ग्रामीणों को भ्रमित कर काटा जा रहा है जिससे पर्यावरण को काफी नुकसान तो पहुंच ही रहा है और जल जंगल जमीन के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है वैसे भी प्रदूषण के मामले में कोरबा जिला आठवें स्थान पर रहा है अब ऐसे में विकास के नाम पर इस तरह विशाल हरे भरे पेड़ों कटने से भविष्य में असंतुलित पर्यावरण की मार झेलने से इनकार नहीं किया जा सकता है, एक ओर जहां उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाते हुए रेलवे लगातार पैसेंजर यात्री ट्रेनें रद्द कर मालगाड़ी कोयला लोड ट्रेनों को विकास के नाम पर जरूरी बता कर बढ़ावा दे रहा है और उद्योगपतियों के उद्योगों को बढ़ाने का काम कर रहा है वही स्थानी रहवासियों के साथ लगातार यात्री ट्रेनें रद्द कर छलावा भी कर रहा है,
ताजा मामला छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना प्रदेश मंत्री दिलीप मिरी ने सोशल मीडिया के द्वारा बताते हुए कहा है कि एसईसीएल कुसमुंडा खदान क्षेत्र से जहां प्रभावित ग्राम जटराज बरकुटा के पास दिनांक 18 -9 -2022, और 19-9-2022 को तहसीलदार और एसईसीएल कुसमुंडा के अधिकारियों के उपस्थिति में शाम होते हैं सैकड़ों की संख्या में बिना वन विभाग के परमिशन के 30- 35 साल पुराने बड़े बड़े पेड़ों को डोजर मशीन से जड़ सहित उखाड़ फेंक दिया गया है, वही ग्रामीणों द्वारा लगाई गई फसल को भी रौदं दिया गया है
क्षतिपूर्ति के रूप में गांव वालों को लॉलीपॉप देखकर शांत करा दिया गया है ।
वृक्षों की संख्या निम्न है
1,नीलगिरी लगभग 70 से 80नग
2 ,नीम पेड़ लगभग 12 से 15 नग
3, खम्हार 7- 8 नग
4,करंज पेड़ लगभग 8 नंगी
5, मुंगा पेड़ 1 नाग
6,कोईलार 3नंग
अन्य वृक्ष पेड़ जिसकी संख्या लगभग 35 से 40 नंग होगी












