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जिस बेटी को कंधों पर बिठाकर पाला, उसी के हाथों पिता की दर्दनाक मौत…

छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिस घर में कभी पिता की डांट में भी बेटी की भलाई छिपी होती है, वहीं जब वही डांट मौत की वजह बन जाए—तो समाज सन्न रह जाता है। कोरबा जिले के SECL प्रभावित क्षेत्र ग्राम रलिया (थाना हरदीबाजार) में घटित यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों के बिखरने की सबसे दर्दनाक तस्वीर है।

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सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच 25 वर्षीय गीता निषाद ने अपने ही पिता अशोक निषाद की जान ले ली। बताया जा रहा है कि गीता कुछ दिनों के लिए कोरबा से अपने पिता के घर आई हुई थी। पिता अशोक निषाद को बेटी के जीवन-यापन और उसके तौर-तरीकों पर आपत्ति थी। एक पिता होने के नाते उन्होंने बेटी को समझाने का प्रयास किया, गलत रास्ते से दूर रहने की नसीहत दी।   

लेकिन यह समझाइश बेटी को स्वीकार नहीं हुई। क्षणिक आवेग, गुस्से और आक्रोश ने ऐसा रूप ले लिया कि रिश्तों की सारी मर्यादा टूट गई। घर में मौजूद हंसिया से पिता पर हमला कर दिया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही हरदीबाजार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। निरीक्षक प्रमोद डडसेना अपने मातहतों के साथ घटनास्थल पर मौजूद रहे। पुलिस ने आरोपी बेटी को हिरासत में लेकर हत्या में प्रयुक्त हंसिया जब्त कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर प्रारंभिक कार्रवाई की गई।

यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है— क्या संवाद की कमी, पारिवारिक तनाव और बदलती सोच रिश्तों को इस हद तक तोड़ रही है? जिस पिता ने जीवन भर बेटी की चिंता की, वही चिंता उसकी आखिरी वजह बन गई।

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