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प्रदेश कांग्रेस सचिव विकास सिंह की बढी मुश्किलें, अंधभक्ती में राजनीतिक शिकार हुए, छत्तीसगढ़िया क्रांति को छेड़ना पड़ा महंगा, एक अपराधिक प्रकरण में न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका की खारिज कि यह आदतन आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। एक्ट्रोसिटी एक्ट के अपराध में अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं है, कभी भी हो सकती है गिरफ्तारी

छत्तीसगढ़/कोरबा :- कहते हैं अगर भक्त बनना है तो राम जैसे चरित्रवान के और हनुमान जैसे गुणवान भक्त, लेकिन आज कोरबा जिले में एक ऐसे अंधे भक्त ने अपने पैर में कुल्हाड़ी मारते हुए राजनीतिक षड्यंत्र का शिकार हो गये हैं, जिन्होंने अपने अंधभक्त में एक गैर राजनीतिक संगठन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना को छेड़ते हुए छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के लोगों को एक दिन पहले कांग्रेस पार्टी में 200 लोगों की सदस्यता की प्रेस विज्ञप्ति अपना फोटो के साथ जारी करवाई थी लेकिन छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए इस बात को खंडन करते हुए बताया है कि यह लोग छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के लोग नहीं है, सच्चाई क्या है यह तो आने वाले समय में पता लग पाएगा, लेकिन जो आज खबरें आ रही है उसमें बताया गया है कि प्रदेश कांग्रेस के सचिव विकास सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके विरुद्ध दर्ज एक आपराधिक प्रकरण में विशेष न्यायालय ने अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज कर दिया है। यह आवेदन खारिज होने के बाद विकास सिंह की गिरफ्तारी के आसार बढ़ गए हैं।
न्यायालयीन सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया है कि विकास सिंह के विरुद्ध कोरबा जिले के थाना दीपका में अपराध क्रमांक 75/ 2020 पर धारा 354 क(1)(2),354 घ, 506, 509 भादवि तथा एससी-एसटी एक्ट की धारा 3,2,5 क, के तहत अपराध दर्ज कराया गया। पीड़िता की रिपोर्ट पर अपराध दर्ज कर इसे विवेचना में लिया गया। विचारण पश्चात मामला न्यायालय में पेश किया गया है। इस प्रकरण में विकास सिंह के द्वारा अग्रिम जमानत के लिए धारा 438 के तहत आवेदन विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। आज विशेष न्यायाधीश (एक्ट्रोसिटी) डी एल कटकवार के द्वारा अग्रिम जमात का आवेदन खारिज कर दिया गया। विशेष न्यायाधीश ने केस डायरी के साथ संलग्न आरोपी विकास सिंह के विरुद्ध पूर्व में दर्ज अपराधों की सूची को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह आदतन आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। एक्ट्रोसिटी एक्ट के अपराध में अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए अग्रिम जमानत का आवेदन खारिज किया जाता है। इस तरह मामले में विकास को अपेक्षित राहत नहीं मिली है ।

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