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रेलवे यात्रियों ने कहा मोदी सरकार में रेलवे का सबसे बुरा हाल, पहले रेल यात्रा करने वालों के इतने बुरे दिन कभी नहीं आए, आखिर क्यों नहीं सुधर रही रेलवे की व्यवस्था

छत्तीसगढ़/कोरबा :- रेलवे यात्रियों की माने तो देश में जिस प्रकार रेल यात्रा को लेकर वर्तमान में रेल यात्रियों में असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है शायद यह आजादी के बाद पहले कभी नहीं देखी गई है यात्रियों का कहना है कि कोरोना काल में रेलवे द्वारा विभिन्न ट्रेनों के परिचालन को रोक दिया गया था और अनेक नियम कायदे यात्रियों की सुरक्षा और कोरोना संक्रमण के बढ़ते गति को रोक लगाने जिस प्रकार रेलवे द्वारा यात्रियों पर भारी नियम कायदों का हवाला देते हुए रेलवे यात्रियों की सुखद यात्रा को दुखद बना दिया था जो आज तक दुरुस्त नहीं हो पाई है भले ही ट्रेनें चालू कर दी गई हैं लेकिन आए दिन ट्रेनों के कैंसिल और लेटलतीफी का सिलसिला जारी है जिससे यात्री अपनी मंजिल पर समय पर नहीं पहुंचने पर परेशान तो होते ही हैं वही रेलवे की इस लचर व्यवस्था को लेकर रेलवे प्रशासन और मोदी सरकार को कोसते दिखाई देते नजर आते हैं,

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बात करें ऊर्जा नगरी कोरबा जिले की तो यहां स्थिति रेलवे की बद से बदतर नजर आ रही है यात्रियों की हरदम शिकायत रहती है की यात्री ट्रेनें आए दिन रद्द कर दी जाती हैं कई ट्रेनें चलाई ही नहीं जा रही हैं इसके साथ साथ हर दिन यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी रेलवे यात्रियों के लिए दुखद बनी हुई है कोरबा से यात्री रेल सुविधा के नाम पर कई आंदोलन विभिन्न सामाजिक संगठनों के द्वारा किए जा चुके हैं कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने भी अपनी तरफ से यात्री रेलवे सुविधा को लेकर प्रयास किए हैं बावजूद इसके यात्री रेल सुविधा रेल यात्रियों को वर्तमान में सही ढंग से मिलती हुई नजर नहीं आ रही है जिसके कारण हर कोई केंद्र सरकार को कोसते हुए उसकी नाकामी और केंद्र सरकार को पूंजीपतियों और उद्योगपतियों की सरकार बताते नजर आ रहे हैं यात्रियों का कहना लगभग इसलिए सही माना जा सकता है क्योंकि कोरबा जिला ऊर्जा नगरी और उद्योग नगरी के साथ-साथ कोयलांचल क्षेत्र भी है जहां एशिया की सबसे बड़ी गेवरा कोयला की खदान के साथ-साथ दीपका कुसमुंडा मानिकपुर सरायपाली अन्य कई कोयला खदानें हैं यहां बालकों एनटीपीसी सीएसईबी जैसे पावर प्लांटों के साथ-साथ कई छोटे बड़े पावर प्लांट और औद्योगिक इकाइयां मौजूद हैं कोरबा जिले से देश के विभिन्न जगहों में बिजली की खपत के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के औद्योगिक व पावर प्लांटो में कोयले का निर्यात किया जाता है जिसके लिए रेलवे प्रशासन द्वारा कोरोना काल में भी यह सुविधा जारी रखा अब कोरोना कालका अंत होने के बाद भी रेलवे द्वारा रेल यात्रियों की गाड़ियों को दरकिनार करते हुए उद्योगपतियों को कोयला पहुंचाने मैं लेटलतीफी नहीं करता है भले ही रेलयात्री गाड़ियों को कैंसिल या फिर 4 से 6 घंटे लेट करना पड़े रेलवे द्वारा ऐसी अव्यवस्था के कारण कोरबा सहित देश के विभिन्न रेल यात्रियों में रेलवे की ऐसी अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश रेल यात्रियों मे देखा जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय व प्रशासन को ध्यान देने की जरूरत है ।

आज एक रेलवे में सफर कर रहे यात्री ने बताया कि कोरबा से दोपहर 01:35 बजे निकलकर शाम 06:30 बजे चांपा स्टेशन पहुंची। मेमू लोकल रेलगाड़ी करीब 1 घंटे मड़वारानी, आधा घंटे कोथारी एवं ढाई घंटे से ज्यादा समय तक बालपुर गाड़ियों के परिचालन को रोककर उक्त स्टेशनों पर ठहराव करते हुए सैकड़ों यात्रियों को हुई बेवजह परेशानी हुई। जिसमें छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्ति एवं जिनको दूसरी रेलगाड़ी में सवार होने के लिए कनेक्टिंग रेलगाड़ी पकड़नी थी। बालपुर स्टेशन में यात्रियों की परेशानियों को जूझते देखकर उक्त रेलगाड़ी में सफर कर रहे रेलवे एवं जनसमस्याओं से हमेशा संघर्ष करने वाले नागरिक संघर्ष समिति, कोरबा के अध्यक्ष मो. न्याज नूर आरबी ने मौजूद यात्रियों के साथ नारेबाजी, प्रदर्शन करते हुए रेलवे के उच्च अधिकारियों से बात की एवं रेलवे की उपेक्षाओं से जूझते हुए सफर किए।

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