छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले के धान उपार्जन केंद्रों में अव्यवस्था की तस्वीर अभी भी साफ नजर आ रही है। कोरबा जिले के 15 धान उपार्जन केंद्रों में सैकड़ों क्विंटल धान का उठाव अब तक नहीं हो पाया है, जिससे संबंधित समितियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार 31 जनवरी से 15 मार्च के बीच सभी समितियों के डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) जारी कर दिए गए थे, इसके बावजूद मिलर्सो की लापरवाही के चलते धान का उठाव नहीं हो सका। इस लापरवाही का सीधा असर समितियों पर पड़ रहा है, जिन्हें “सुखती” (धान सूखने से वजन में कमी) के नाम पर भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि धान की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर समिति प्रबंधकों व प्रभारियों को दिन-रात मशक्कत करनी पड़ रही है। खुले में पड़े धान को सुरक्षित रखना उनके लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में लगभग 99 प्रतिशत जिम्मेदारी मीलरों की लापरवाही की है, लेकिन इसका खामियाजा समितियों को भुगतना पड़ रहा है। शासन की ओर से यदि सुखती में राहत नहीं दी गई तो समितियों पर लाखों रुपये के जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में संबंधित समितियों ने शासन-प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने और सुखती में राहत प्रदान करने की मांग की है, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।













