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कन्वेंशनल हॉल निर्माण कार्य में मजदूरों की जान से खिलवाड़, बिना सेफ्टी उपकरण के मजदूरों से कराया जा रहा कार्य, समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं होने से 3 करोड़ अतिरिक्त लागत 

छत्तीसगढ़/कोरबा :- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में लगभग 20 करोड़ की लागत से बनने वाले कन्वेंशनल हॉल निर्माण में लगे मजदूरों की सुरक्षा में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है जहां निर्माण में लगे मजदूरों को लगभग 100 फीट से अधिक ऊंचाई पर चढ़ाकर बिना सुरक्षा सामग्री के काम कराया जा रहा है वही नीचे लगे मजदूरों को भी किसी प्रकार की सुरक्षा सामग्री नहीं दी गई है आपको बता दें कि जिले के रिस्दी रोड में वर्ष 2016-17 में जिला खनिज न्यास से राशि रुपए 1714.64 लाख स्वीकृत किए गए थे जिसको अनुबंध के अनुसार 16/8/2018 में पूर्ण करना था लेकिन समय अवधि में कन्वेंशनल हाल निर्माण का कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण अब इसके निर्माण की लागत भी लगभग तीन करोड़ की अतिरिक्त राशि बढ़ गई है साइट इंजीनियर ने बताया कि 20 करोड़ 9 लाख में निर्माण किया जा रहा है, ज्ञात हो अब शासन प्रशासन को लगभग तीन करोड़ अतिरिक्त इस कन्वेंशनल हाल बनाने में खर्च करने पड़ रहे हैं आखिर कन्वेंशनल हाल समय अवधि में क्यों पूर्ण नहीं हो पाया अब 4 साल अधिक का समय बीतने के कारण लगभग तीन करोड़ का अतिरिक्त बोझ शासन प्रशासन को पड़ रहा है आखिर किसकी लापरवाही के कारण समय अवधि से लगभग 4 वर्ष अतिरिक्त समय में कार्य पूर्ण किया जा रहा है, आखिर उद्योगों और कोयला खदानों से प्रभावित लोगों के पैसे का इस तरह दुरुपयोग करना कहां तक जायज है जानकारी अनुसार खनिज न्यास फंड का पैसा उद्योगों और कोयला खदानों से प्रभावित लोगों के उनके क्षेत्र में विकास के लिए खर्च किए जाते हैं, कछुए की चाल से बन रहे इस कन्वेंशनल हॉल जिसकी क्रियान्वयन एजेंसी छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल संभाग कोरबा है इनके द्वारा ना तो कार्य समय पर पूर्ण किया गया और लगातार कार्य कर रहे मजदूरों के सुरक्षा को भी ध्यान में रखा और उनके जान से खिलवाड़ किया जा रहा है इस मामले में मौजूद साइट इंजीनियर से जब मजदूरों के सेफ्टी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमने सभी को सामग्री उपलब्ध कराई है लेकिन मजदूर लगाना नहीं चाहते लेकिन कार्यस्थल पर हेलमेट व अन्य सामग्री भी मौजूद नहीं दिखी कुछ मजदूर कमर से बेल्ट को जरूर बांधे थे और कुछ नहीं लेकिन इतने खतरनाक काम में किसी ने भी हेलमेट नहीं लगा रखा था अगर इस तरह की लापरवाही में कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा क्या इंजीनियर को या क्रियान्वयन एजेंसी को बिना सेफ्टी के मजदूरों को काम करने देना चाहिए यह एक बड़ा का सवाल है । वही हाल के ग्राउंड में चल रहे निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली रेत भी घटिया क्वालिटी की उपयोग की जा रही है । यही कारण है कि सरकारी भवनों की हालत 1 से 2 वर्ष या 3 वर्ष में खराब हो जाती है ।

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