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श्रावण मास में खान-पान और दिनचर्या का रखें विशेष ध्यान, मौसमी बीमारियों से बचेंगे: आयुर्वेदाचार्य डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा

हरी पत्तेदार साग, बैंगन, मशरूम और भारी भोजन से परहेज की सलाह, हरीतकी सेवन को बताया लाभकारी

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  श्रावण मास के दौरान खान-पान और जीवनशैली में सावधानी बरतने से मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है। यह सलाह छत्तीसगढ़ के प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने दी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक रहेगा और आयुर्वेद में इस अवधि के लिए विशेष आहार-विहार का उल्लेख किया गया है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि वर्षा ऋतु में वातावरण में नमी और गंदगी बढ़ने से संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। आयुर्वेद के अनुसार इस समय वात दोष असंतुलित हो जाता है और पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है, जिससे जोड़ों का दर्द, त्वचा रोग, दस्त, टाइफाइड, मलेरिया, आंखों के संक्रमण तथा पेट संबंधी समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है।
उन्होंने सलाह दी कि श्रावण मास में पुराने चावल, जौ, गेहूं, मूंग की खिचड़ी, लौकी, परवल, तुरई, अदरक, जीरा, मैथी और लहसुन जैसे हल्के, सुपाच्य एवं ताजे भोजन का सेवन करना चाहिए। साथ ही हरीतकी (हरड़) का सेवन वात दोष को संतुलित करने और पाचन शक्ति बढ़ाने में लाभकारी बताया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि इस मौसम में हरी पत्तेदार सब्जियां, बैंगन, मशरूम, चना, उड़द, मोंठ, मसूर, मटर, आलू, कटहल, अरबी, दूध, दही तथा बासी भोजन से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये पचने में भारी होते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उबालकर या शुद्ध किया हुआ पानी ही पीने की सलाह भी दी।
जीवनशैली के संबंध में उन्होंने नियमित तेल मालिश (अभ्यंग), स्वच्छ एवं हल्के वस्त्र पहनने, भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े बदलने तथा हाथ-पैरों की अच्छी तरह सफाई करने की सलाह दी। वहीं दिन में सोने, रात्रि जागरण, अत्यधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, धूप में लंबे समय तक रहने और गंदे या अज्ञात जलाशयों में स्नान करने से बचने को कहा।
उन्होंने मच्छरों और कीट-पतंगों से बचाव के लिए मच्छरदानी के उपयोग, घर के आसपास पानी जमा न होने देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने पर भी जोर दिया। डॉ. शर्मा ने कहा कि श्रावण मास में आयुर्वेद के अनुसार खान-पान और दिनचर्या अपनाकर मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है और बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है।

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