HomeBreaking Newsएनटीपीसी कोरबा : जनसंपर्क विभाग की लापरवाही से संस्थान की साख दांव...

एनटीपीसी कोरबा : जनसंपर्क विभाग की लापरवाही से संस्थान की साख दांव पर

बंद कमरों तक सिमटा CSR, जनता से संवाद शून्य; बढ़ता जन-असंतोष

छत्तीसगढ़/कोरबा :- देश की महारत्न सार्वजनिक उपक्रम एनटीपीसी (NTPC) जहाँ एक ओर विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही है, वहीं कोरबा परियोजना का जनसंपर्क (PR) और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) विभाग अपनी कार्यप्रणाली के चलते संस्थान की वर्षों से बनी साख को गंभीर नुकसान पहुँचा रहा है। करोड़ों रुपये के CSR बजट और कागजी उपलब्धियों के दावों के बीच जमीनी सच्चाई इससे ठीक उलट नजर आ रही है।

- Advertisement -
CSR फाइलों में कैद, ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

प्राप्त जानकारी के अनुसार एनटीपीसी कोरबा द्वारा समावेशी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और कौशल प्रशिक्षण के नाम पर वर्षों से योजनाएँ दर्शाई जा रही हैं, लेकिन परियोजना से प्रभावित और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इसका ठोस असर दिखाई नहीं देता।
तीन-स्तरीय CSR निगरानी व्यवस्था के दावे के बावजूद स्थानीय जनता आज भी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, जिससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या CSR केवल रिपोर्टिंग तक सीमित रह गया है?

जनसंपर्क विभाग : संवाद नहीं, असंवेदनशीलता का प्रतीक

कोरबा परियोजना का जनसंपर्क विभाग, जो किसी भी सार्वजनिक उपक्रम का जनता से सेतु होता है, यहाँ असंवेदनशीलता और गैर-जिम्मेदारी का उदाहरण बन चुका है।
स्थानीय नागरिकों की शिकायतें हों या पत्रकारों के फोन—जवाब देना तो दूर, संपर्क साधना तक विभाग मुनासिब नहीं समझता।
सूत्रों के अनुसार कई बार जानकारी छिपाने और संवाद से बचने की प्रवृत्ति साफ दिखाई देती है, जो एक जिम्मेदार सार्वजनिक उपक्रम की छवि के सर्वथा विपरीत है।

‘अहंकार’ में डूबा सिस्टम, बढ़ता जन-आक्रोश

स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी कोरबा का PR और CSR तंत्र बंद कमरों में निर्णय लेने तक सीमित हो गया है। न जनसुनवाई, न संवाद, न फीडबैक—जिससे जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
यदि समय रहते इन विभागों की कार्यशैली में सुधार नहीं किया गया, तो यह जन-आक्रोश भविष्य में प्रबंधन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

प्रबंधन से जवाबदेही की मांग

अब यह आवश्यक हो गया है कि एनटीपीसी के उच्च प्रबंधन द्वारा

  • CSR योजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट

  • जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा

  • स्थानीय जनता और मीडिया से खुले संवाद की व्यवस्था
    तत्काल सुनिश्चित की जाए, ताकि महारत्न कंपनी की छवि को और नुकसान न पहुँचे।

जनता यह पूछ रही है—क्या एनटीपीसी केवल उत्पादन में महारत्न है, या सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी?

Must Read