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कोरबा में प्रकृति ने किया सावन का स्वागत, मौसम ने बिखेरा जादुई रंग

प्रकृति ने रचा मनोहारी दृश्य, बादलों की गोद में खिला वनांचल, बादलों की चादर, हरियाली की बौछार… वनांचल में बहार ही बहार

छत्तीसगढ़/कोरबा :- सावन के दस्तक देते ही कोरबा का वनांचल क्षेत्र किसी स्वप्नलोक जैसा प्रतीत हो रहा है। चारों ओर फैले घने बादल, रिमझिम बारिश और हरियाली की चादर ने पूरे इलाके को एक जीवंत चित्रकला में बदल दिया है। कोरबा के जंगल, पहाड़ और घाटियां इन दिनों बादलों की मद्धम ओट में लिपटी नजर आ रही हैं, जैसे प्रकृति ने खुद अपने हाथों से इसे सजाया हो।

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सुबह-सुबह पहाड़ी इलाकों में छाई धुंध और उमड़ते-घुमड़ते बादलों का अद्भुत समागम स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। हर टहनी से टपकती बूंदें, हर पत्ता नमी से भरा और मिट्टी की सोंधी सुगंध—ये सब मिलकर मानो सावन का सुर रच रहे हों।

खास बात यह है कि इस बार बारिश समय पर और संतुलित हो रही है, जिससे जहां जंगल हरे-भरे हो उठे हैं, वहीं किसानों के चेहरों पर भी उम्मीद की मुस्कान लौट आई है। कोरबा के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में यह मौसम एक त्योहार की तरह मनाया जा रहा है।

मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में बारिश और भी जोर पकड़ सकती है। इससे जल स्रोतों में वृद्धि होगी और वन्यजीवों के लिए भी यह समय बेहद अनुकूल सिद्ध होगा। पक्षियों की चहचहाहट, बारिश की रुनझुन और बादलों की गोद में लिपटी वादियां—कोरबा का यह सावन वाकई में अनमोल है। स्थानीय निवासी कहते हैं, “जब कोरबा के जंगलों में बादल नाचते हैं, तब ही तो असली बरसात की बहार आती है।”

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