छत्तीसगढ़/कोरबा :- सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत समाज कल्याण विभाग, जिला कोरबा से प्राप्त जानकारी में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। विभाग के उप संचालक एवं जन सूचना अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्रवण यंत्र योजना मद से किसी भी प्रकार की खरीदी नहीं की गई है। 
इस खुलासे के बाद कई सवाल उठने लगे हैं। यदि पूरे वित्तीय वर्ष में श्रवण यंत्रों की खरीदी नहीं हुई, तो क्या शासन के पास इस योजना के लिए बजट की कमी है? साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि ऐसे में नए हितग्राहियों को श्रवण यंत्र किस प्रकार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मामले में जब हरीश सक्सेना उप संचालक समाज कल्याण विभाग से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 एवं उससे पूर्व खरीदे गए श्रवण यंत्रों का ही वर्तमान में वितरण किया जा रहा है। हालांकि इस जवाब के बाद यह प्रश्न भी खड़ा हो गया है कि पूर्व वर्षों में कितनी मात्रा में श्रवण यंत्रों की खरीदी की गई थी, जो अब तक वितरण में उपयोग हो रही है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला चर्चा में है। कांग्रेस पार्टी द्वारा समय-समय पर योजनाओं में फंड की कमी और लापरवाही के आरोप लगाए जाते रहे हैं। ऐसे में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त यह जानकारी कहीं न कहीं इन आरोपों को बल देती नजर आ रही है।
जन सूचना अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हितग्राहियों से संबंधित व्यक्तिगत आवेदन एवं दस्तावेज सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत उपलब्ध नहीं कराए जा सकते।
श्रवण यंत्र जैसी आवश्यक सुविधा पर खरीदी नहीं होने से हितग्राहियों की स्थिति और विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इस स्थिति पर क्या स्पष्टीकरण देता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।













