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KORBA : रेडी टू ईट समूह चयन पर बवाल, कमिश्नर के स्टे के बावजूद अपात्र समूहों से कराया जा रहा काम

स्व सहायता समूहों का आरोप – अधिकारियों की मनमानी, न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना

छत्तीसगढ़/कोरबा :- आकांक्षी जिला कोरबा में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण आहार 2.0 योजना अंतर्गत रेडी टू ईट (RTE) एवं फोर्टीफाइड आटा आपूर्ति के लिए स्व सहायता समूहों के चयन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। परियोजना हरदीबाजार एवं कटघोरा में पात्र समूहों की अनदेखी कर अपात्र समूहों को कार्य सौंपे जाने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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समूह चयन को लेकर दाखिल शिकायतें इस समय संभागायुक्त कार्यालय, बिलासपुर में विचाराधीन हैं और यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद आरोप है कि जिला स्तर के अधिकारी अपात्र समूहों से कार्य प्रारंभ कराने के लिए लगातार बैठकें, निरीक्षण और नोटिस जारी कर रहे हैं।

पात्र समूहों ने फिर खटखटाया कमिश्नर का दरवाजा

हरदीबाजार की जिया स्व सहायता समूह एवं मलगांव की संतोषी स्व सहायता समूह ने 26 दिसंबर 2025 एवं 1 जनवरी 2026 को पुनः संभागायुक्त से शिकायत करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में चयन समिति के अध्यक्ष सह जिला पंचायत सीईओ, तत्कालीन व वर्तमान जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और महिला बाल विकास कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 लिपिक पर नियमों को ताक पर रखकर अपात्र समूहों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

स्टे के बावजूद बैठकों और निरीक्षणों की लंबी फेहरिस्त

शिकायत पत्र में उल्लेख है कि कमिश्नर के आदेश के बाद भी—

  • 18 जून 2025 को जिला पंचायत में चयनित व अपात्र समूहों की परिचयात्मक बैठक

  • 17 सितंबर 2025 को कलेक्टर सभागृह में ठेकेदारनुमा व्यक्तियों की मौजूदगी में बैठक

  • राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा यूनिट निरीक्षण

  • व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर ठेकेदारों को निर्देश

  • यूनिट स्थापित कर कार्य प्रारंभ करने के लिए बार-बार नोटिस

जैसी कार्यवाहियां की गईं, जिन्हें सीधे तौर पर न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना बताया गया है।

कटघोरा परियोजना में चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
शिकायत के अनुसार कटघोरा परियोजना में दावा-आपत्ति अवधि के बाद द्वितीय सूची में अपात्र समूह का नाम जोड़कर प्रथम स्थान पर चयन किया गया। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक दस्तावेज बाद में जोड़कर रिकॉर्ड में हेरफेर की गई। इस संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगे जाने पर विभाग द्वारा संतोषजनक उत्तर भी नहीं दिया गया।
ठेकेदार संस्कृति पर भी उठे सवाल

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई समूहों में वास्तविक महिला सदस्यों की बजाय ठेकेदारनुमा पुरुषों का नियंत्रण है। समूह खातों में लाखों रुपये जमा कर मशीनें खरीदने, सरकारी बैठकों में शामिल होने और निर्णय प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं।

संभागायुक्त से स्पष्ट मांग

शिकायतकर्ता समूहों ने मांग की है कि—

  • जब तक प्रकरण का अंतिम निराकरण न हो, हरदीबाजार एवं कटघोरा परियोजनाओं में रेडी टू ईट कार्य पर पूर्ण रोक लगाई जाए

  • न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच हो

फिलहाल इस पूरे मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका है।

सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम

महिला समूहों और विभागीय अधिकारियों के बीच चल रही इस खींचतान के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
आकांक्षी जिला कोरबा में महिला स्व सहायता समूहों के माध्यम से रेडी टू ईट उत्पादन एवं वितरण आखिर कब शुरू होगा? और क्या “मोदी की गारंटी” पर वास्तव में समय रहते मुहर लग पाएगी?

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