छत्तीसगढ़/कोरबा :- शहर के कोसाबाड़ी चौक स्थित रेशम विभाग की बहुमूल्य जमीन एक बार फिर अवैध कब्जे और निर्माण का केंद्र बनती नजर आ रही है। करोड़ों की सरकारी संपत्ति मानी जाने वाली रेशम बाड़ी में सैकड़ों पेड़ों की कटाई कर धड़ल्ले से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर रेशम उत्पादन के लिए विभाग द्वारा वर्षों पहले पौधे लगाए गए थे, उसे योजनाबद्ध तरीके से पहले उजाड़ा गया और अब वहां पर कब्जा कर दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। 
जानकारी के अनुसार यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इसी रेशम बाड़ी की जमीन पर अवैध कब्जा कर कई दुकानों का निर्माण कराया जा चुका है, जिनसे किराया वसूली कर मोटी कमाई की जा रही है। अब एक बार फिर उसी जमीन पर नए सिरे से निर्माण कर अवैध संपत्ति अर्जित करने की तैयारी की जा रही है। निर्माण कार्य इतने बेखौफ तरीके से किया जा रहा है कि मानो जिम्मेदार विभागों का कोई डर ही नहीं रह गया हो।
सूत्र बताते हैं कि कब्जाधारियों ने पहले रेशम विभाग द्वारा कराई गई फेंसिंग को उखाड़ दिया और वहां ठेला-गुमटी रखवा कर धीरे-धीरे जमीन पर कब्जा जमाया। इसके बाद अपनी बाउंड्री तैयार कर पूरी जमीन को घेर लिया गया। अब इसी बाउंड्री के अंदर हाई प्रोफाइल बिल्डिंग व दुकानों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसके साथ ही रेशम विभाग द्वारा कराई गई फेंसिंग को तोड़कर और पेड़ों को काटकर जमीन को पूरी तरह खाली किया गया, ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।
हालांकि कोरबा में जमीनों के हेरफेर को लेकर पहले भी कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं, जहां एक जगह की जमीन दूसरे स्थान पर दर्शाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक यदि 25-30 साल पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाएं, तो स्पष्ट रूप से यह जमीन रेशम विभाग की रेशम बाड़ी के रूप में दर्ज नजर आएगी। वहीं कोसाबाड़ी स्थित इस जमीन के सामने जिस प्रकार ठेला-गुमटी की बाढ़ सी आ गई है और लगातार लोग गुमटी रखकर व्यवसाय कर रहे हैं, उससे आने वाले समय में स्थिति और जटिल होने की आशंका है। आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में यही लोग इस जमीन पर अपना दावा ठोक सकते हैं, जिससे विभाग के लिए उन्हें हटाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर गरीबों द्वारा किए गए छोटे-मोटे कब्जों पर नगर निगम या प्रशासन तत्काल सख्ती दिखाता है, वहीं इस बड़े मामले में कार्रवाई के बजाय निर्माणकर्ताओं को खुली छूट मिलती नजर आ रही है।
मामले में यह भी चर्चा है कि विभाग के कुछ अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है और उनके संरक्षण में ही यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। हालांकि रेशम विभाग द्वारा इस अवैध कब्जे और निर्माण को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की गई है, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नजर नहीं आया है।
ऐसे में समय रहते प्रशासन द्वारा कठोर और न्यायप्रिय कार्रवाई करना बेहद जरूरी हो गया है, अन्यथा आने वाले दिनों में यह अतिक्रमण और विकराल रूप ले सकता है तथा सरकारी जमीन को बचाना मुश्किल हो जाएगा।











