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शासकीय कर्मचारियों का हड़ताल पर जाना अवैधानिक और सिविल सेवा आचरण का उल्लंघन

छत्तीसगढ़/अंबिकापुर :- जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव के एक लेटर से हड़तालियों में हड़कंप मच गया हैं । चिट्ठी में सभी न्यायिक कर्मचारियों को उच्चतम न्यायालय का हवाला देते हुए हड़ताल को अवैधनिक बताया गया हैं । बता दें कि अम्बिकापुर सरगुजा के जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव अमित जिंदल ने 28 अगस्त को एक चिट्ठी जारी किया हैं । जिसमें उच्चतम न्यायालय के निर्णय टी.के. रंगराजन बनाम तमिलनाडु राज्य ए.आई.आर. 2003 एस . सी . 3032 के का हवाला देते हुए लिखा है कि शासकीय कर्मचारी का हड़ताल पर जाना असंवैधानिक है । और इसके अतिरिक्त उक्त कृत्य छ 0 ग 0 सिविल सेवा आचरण नियम 3 , 21 का भी उल्लंघन करता है । इसी प्रकार आप सभी से अपेक्षा है कि आप सभी कार्य पर तत्काल लौटे ।

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आपको बता दें कि हड़ताल कर रहे कई कर्मचारियों का वेतन लाखों रुपए के ऊपर है, सिविल सेवा आचरण का उल्लंघन भी है बावजूद इसके नियम विरुद्ध सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारी नियम विरुद्ध हड़ताल पर हैं जिससे शासकीय कार्य तो प्रभावित तो हो ही रहे हैं वही आम जनता को काफी कठिनाइयों का सामना उठाना पड़ रहा है । कई हड़ताली कर्मचारियों में कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जो विभागीय कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी से नहीं करते हैं और आए दिन हड़ताल करने के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं और कर्मचारियों को हड़ताल करने के लिए उकसाते रहते हैं ऐसे लापरवाह कर्मचारियों को चिन्हाकित किया जाना चाहिए, और सिविल सेवा आचरण नियम के तहत कार्यवाही की जानी चाहिए । कई ऐसे कर्मचारी हैं जो इस नियम विरुद्ध हड़ताल का समर्थन नहीं करते हैं और हड़ताल में जाना भी नहीं चाहते लेकिन मजबूरी और संघ के दबाव के कारण हड़ताल में शामिल होने पर मजबूर हो जाते हैं । यहां तक कि विपक्षी पार्टियां भी सरकार के कर्मचारियों के समर्थन में आकर सरकार के खिलाफ अनाप-शनाप बोलते हैं ।

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