HomeBreaking Newsआस्था की आड़ में चंदा उगाही, बावजूद इसके गरबा करने वालों को...

आस्था की आड़ में चंदा उगाही, बावजूद इसके गरबा करने वालों को बिना पास के एंट्री नहीं, पास देने के बाद ड्रेस कोड की भी अनिवार्यता

छत्तीसगढ़/कोरबा :- आस्था की आड़ में पैसों की वसूली पहले ही कर चुके होते हैं चंदा उगाही, बावजूद इसके गरबा करने वालों को बिना पास के एंट्री नहीं दी जाती है, वही पास देने के बाद ड्रेस कोड की भी अनिवार्यता कर लोगों को बाध्य किया जाता है, ऊपर से ग्राउंड में क्षमता से अधिक बेकाबू भीड़…

- Advertisement -

नवरात्रि पर्व पर जिले में गरबा डांडिया की धूम मची हुई है नवरात्रि के पावन पर्व को देखते हुए 9 दिन आस्था और भक्ति में लीन भक्तगण गरबा रास करने जाते हैं लेकिन यहां भी उनकी भक्ति की कीमत वसूली जाती है, ऐसे तो गरबा आयोजन कर्ताओं द्वारा गरबा के आयोजन के लिए 1 माह पहले दानदाताओं से चंदा वसूल लिया जाता है बावजूद इसके गरबा करने वाले प्रेमियों जिसमें महिला, पुरुष, युवक-युवती, बच्चे सभी से गरबा करने के नाम से 200 रुपए का पास लेने के बाद गरबा करने के लिए एंट्री मिलती है ऊपर से आयोजकों द्वारा ड्रेस कोड की अनिवार्यता के लिए बाध्य किया जाता है ड्रेस कोड पर नहीं आने वाले लोगों को गरबा मे भाग लेने से रोक दिया जाता है जिससे लोग ठगा सा महसूस करते हैं और उनके मनोरंजन उत्साह में कमी आती है, कई बच्चों के जिद के आगे उनके अभिभावक ड्रेस कोड खरीदने पर मजबूर हो जाते हैं तो कई अभिभावकों को बच्चों को तसल्ली देते हुए बहला-फुसलाकर मायूसी के साथ घर लौट आते हैं, और बच्चों की जिज्ञासा शांत करने के लिए अन्य जगह चल रहे निःशुल्क गरबा या बिना ड्रेस कोड वाले गरबा ग्राउंड में पहुंचकर बच्चों को गरबा डांडिया रास में शामिल कराते हैं,

दरअसल कोरबा शहर के कोसा बाड़ी दशहरा मैदान में हर वर्ष दुर्गा जी की मूर्ति विराजित की जाती है जहां 9 दिन भक्तों का मेला लगा रहता है हर दिन गरबा का भी कार्यक्रम किया जाता है जहां दूर-दूर से लोग गरबा में भाग लेने पहुंचते हैं इसके बाद दशहरा के दिन रावण दहन किया जाता है जहां ग्राउंड में क्षमता से अधिक भीड़ उमड़ती है , यह कार्यक्रम रास गरबा दुर्गा पूजा एवं दशहरा उत्सव समिति कोसा बाड़ी कोरबा द्वारा कराया जा रहा है, कुछ लोगों ने बताया कि समिति द्वारा पहले से ही नव दुर्गा एवं दशहरा गरबा के लिए लोगों से चंदा वसूल लिया गया है इसके बाद भी गरबा रास डांडिया में भाग लेने के लिए 200 रुपए प्रति गरबा करने वाले बच्चों युवक-युवतियों से लिया जाता है जिसमें हर दिन क्षमता से अधिक हजारों की तादाद में लोग गरबा राशि में भाग लेने पहुंचते हैं लेकिन उनके अरमानों में तब पानी फिर जाता है जब आयोजनकर्ताओं द्वारा ड्रेस कोड की अनिवार्यता के लिए बाध्य किया जाता है और ड्रेस कोड में नहीं आने वालों को बाहर कर दिया जाता है, कुछ लोगों ने बताया कि जो लोग सक्षम हैं वह तो ड्रेस कोड की व्यवस्था कर लेते हैं लेकिन जो असक्षम हैं उन्हें अपने बच्चों को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाना पड़ता है जिससे बच्चों में हीन भावना आती है जो स्वस्थ समाज के लिए कतई उचित नहीं है ।

जबकि होना यह चाहिए कि आयोजकों द्वारा चंदा की रकम लोगों से वसूली की जाती है तो डांडिया गरबा रास निःशुल्क एंट्री देना चाहिए अगर निःशुल्क एंट्री नहीं दे सकते तो कुछ समिति के खर्चों की पूर्ति के लिए कम अमाउंट में कार्यक्रम आयोजित करवाना चाहिए और ड्रेस कोड की अनिवार्यता नहीं करनी चाहिए । वैसे भी चंदे के अलावा माता दुर्गा जी में काफी चढ़ावा भी चढ़ता है और हजारों गरबा रास करने वालों से 200 रुपए की पास के नाम पर वसूली कहीं न कहीं आयोजनकर्ताओ के भक्ति स्वरूप किए जा रहे कार्यक्रम पर प्रश्नचिन्ह लगाता है ।

Must Read