छत्तीसगढ़/कोरबा :- संघर्ष और नक्सल प्रभाव की पहचान रखने वाले क्षेत्रों से अब एक नई सकारात्मक कहानी लिखी जा रही है। प्रदेश की धरती एक बार फिर बदलाव की मिसाल बनने जा रही है, जहाँ बंदूक की जगह हरियाली का संदेश गूंजेगा। “ट्री मैन ऑफ इंडिया” के नाम से प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता विष्णु लाम्बा इन दिनों छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं और उनके नेतृत्व में “नक्सल ग्रीन मिशन” के माध्यम से एक अनूठी पहल शुरू की गई है। 
कोरबा में प्रेस कॉन्फ्रेंस
कोरबा स्थित प्रेस क्लब तिलक भवन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विष्णु लाम्बा ने इस मिशन की विस्तृत जानकारी साझा की। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। 
पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक बात कही—
“प्रकृति हमें जितना देती है, उतना हम वापस नहीं कर पाते हैं, और यह एक गंभीर विषय है जिसका मूल्य कोरबा वासियों सहित हम सभी को भविष्य में चुकाना पड़ेगा।”
उनका यह बयान पूरे कार्यक्रम का सबसे प्रमुख संदेश रहा, जिसमें उन्होंने लोगों को चेताया कि यदि अभी भी प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी नहीं समझी गई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे। 
क्या है “नक्सल ग्रीन मिशन”?
श्री कल्पतरु संस्थान द्वारा संचालित यह अभियान “विनाश से विकास (Guns to Green)” की सोच पर आधारित है। इसका उद्देश्य पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। इस पहल के तहत उन्हें “वन मित्र”, “वन बंधु” और “तरु सखी” के रूप में नई पहचान दी जा रही है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का सामाजिक आंदोलन है, जो यह संदेश देता है कि—“जहाँ कभी संघर्ष था, वहीं से संरक्षण की शुरुआत हो सकती है।”
कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य
- पूर्व नक्सलियों का पुनर्वास और मुख्यधारा में समावेश
- उन्हें पर्यावरण संरक्षण का दूत बनाना
- समाज में अहिंसा और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देना
- जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता की रक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना
मुख्य गतिविधियाँ
- सामूहिक वृक्षारोपण अभियान
- “एक व्यक्ति – एक वृक्ष – एक जिम्मेदारी” का संकल्प
- “ग्रीन एंबेसडर” की घोषणा
- आत्मसमर्पित नक्सलियों का सम्मान
- पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य
यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब देश में नक्सल उन्मूलन को लेकर निर्णायक प्रयास जारी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च 2026 तक भारत को माओवाद मुक्त बनाने के लक्ष्य ने इस पहल को नई ऊर्जा प्रदान की है।
परिवर्तन की नई मिसाल
“नक्सल ग्रीन मिशन” देश और दुनिया के सामने एक नई दिशा प्रस्तुत कर रहा है। इसके माध्यम से पूर्व नक्सली अब पर्यावरण रक्षक की भूमिका निभाएंगे, जंगल संरक्षण में उनकी जमीनी भागीदारी बढ़ेगी और समाज को अहिंसा व सकारात्मक बदलाव का सशक्त संदेश मिलेगा।
“बंदूक छोड़, वृक्ष अपनाओ” — यही इस मिशन का मूल मंत्र बनकर उभर रहा है।
ट्री मैन विष्णु लाम्बा की प्रेरक यात्रा
राजस्थान के टोंक जिले के एक छोटे से गाँव से निकलकर विष्णु लाम्बा ने पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया है।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं—
- 31 वर्षों में 1 करोड़ से अधिक पौधारोपण और संरक्षण
- लाखों पेड़ों को कटने से बचाना
- “परिंडा अभियान” के माध्यम से पक्षियों के लिए जल व्यवस्था
- इको-फ्रेंडली विवाह जैसे अभिनव प्रयोग
- देश के 22 राज्यों में पर्यावरण जागरूकता का प्रसार
- चंबल क्षेत्र के पूर्व दस्युओं सहित समाज के विभिन्न वर्गों को पर्यावरण से जोड़ना
उनके कार्यों को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।



















