छत्तीसगढ़/कोरबा :- ग्राम पंचायत ढोलपुर में चार साल पहले प्राथमिक स्कूल के लिए नए भवन की जरूरत को देखते हुए राशि स्वीकृत की गई थी। कार्य शुरू करने के नाम पर उस समय पद पर रहे सरपंच व सचिव ने 40 प्रतिशत राशि भी निकाल ली पर भवन निर्माण आज तक शुरू नहीं हो सका। एक साल पहले मामले की जांच भी की गई, पर अब तक न तो कोई कार्यवाही हुई और न ही भवन निर्माण ही शुरू किया गया। परिणाम स्वरूप बच्चे बारिश के इस मौसम में गांव के सामुदायिक भवन में कम जगह पर बैठकर बड़ी मुश्किल से पढ़ाई करने मजबूर हैं। मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में की गई है।
इस संबंध में मंगलवार को आयोजित कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों ने एक शिकायत प्रस्तुत की है। उन्होंने बताया कि विकासखंड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत ढोलपुर में शासकीय प्राथमिक शाला संचालित है। इस विद्यालय के बच्चों के लिए नया भवन निर्माण करने राशि स्वीकृति हुई थी। भवन निर्माण की मंजूरी चार साल पहले पूर्व सरपंच-सचिव के कार्यकाल में हुआ था, जिसमें से 40 प्रतिशत राशि सरपंच-सचिव के द्वारा आहरित भी कर ली गई पर चिन्हांकित स्थल में आज तक कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है। ऐसे में इस पाठशाला में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को बैठकर विद्या अध्ययन करने में काफी परेशानी हो रही है। बड़ी मुश्किल से सामुदायिक भवन में 5 कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इस संबंध में ग्रामवासियों के द्वारा कई बार आवेदन पत्र लिखा जा चुका है। बावजूद इसके बच्चों और उनके पालकों की इस समस्या के निराकरण की दिशा में आगे की कोई कवायद नहीं की गई है। उचित कार्यवाही नहीं होने से न तो भवन निर्माण शुरू किया जा रहा और न जांच कार्रवाई के जरिए इस स्थिति के लिए जिम्मेदारों पर ही कोई कार्यवाही की जा रही है। इस संबंध में गठित जांच के लिए जिस जांच अधिकारी पाली को नियुक्त किया गया था, वे भी जांच के लिए पिछले साल 25 मई 2022 को आए थे। उस दौरान जांच अधिकारी द्वारा तैयार किए गए जांच प्रतिवेदन के आधार पर आज एक वर्ष गुजर जाने के बाद भी संबंधितों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से निवेदन है कि शासकीय प्राथमिक शाला ढोलपुर का नया भवन तत्काल बनाया जाए और बच्चों को पढ़ने के लिए अविलंब उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप गांव के बच्चों को शिक्षा का अधिकार के तहत अध्ययन-अध्यापन के लिए उचित बुनियादी सुविधा का लाभ मिल सके और उनकी शिक्षा कठिन की बजाय सरल की जा सके।












