छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले के कृषक संगठनों और किसानों ने आज कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए धान खरीदी व्यवस्था में हो रही अनियमितताओं पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। किसानों का आरोप है कि उपज मंडियों में 17% से कम नमी वाले धान को खरीदी से लौटाया जा रहा है, जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधिकतम नमी सीमा 17% तय है, न कि न्यूनतम। 
किसानों ने बताया कि कृषि उपज मंडी निकासी केंद्रों में समिति के कर्मचारियों द्वारा मनमानी की जा रही है। कई किसान अपने धान को बारदाना, परिवहन और लाईन में लगने के बाद भी बेच नहीं पा रहे। धान की कमी नमी बताकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है।
किसानों ने कहा कि इस प्रक्रिया में उनका भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। कुछ किसानों ने यह भी बताया कि धान की नमी उचित थी, फिर भी कर्मचारियों ने मनमानी करते हुए धान उठाने से इंकार कर दिया। इससे किसानों में भारी आक्रोश देखा गया।
ज्ञापन में किसानों ने कलेक्टर से मांग की है कि—
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17% से कम नमी वाले धान को खरीदी से रोकने की गलत प्रक्रिया तत्काल बंद कराई जाए।
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कर्मचारियों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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किसानों को उनकी मेहनत का न्याय मिले और खरीदी सुचारू रूप से हो।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का त्वरित समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। किसान मोर्चा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से यह ज्ञापन सौंपा और व्यवस्था में सुधार की मांग की।
















