छत्तीसगढ़/कोरबा :- राज्य शासन द्वारा वन्य प्राणियों के लिए जल जंगल बचाने और जंगलों में विचरण करने वाले वन्य प्राणियों की सुरक्षा वाहन की सुविधा में करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं लेकिन कटघोरा वन मंडल में इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है कटघोरा वन मंडल के पाली रेंज में अक्सर हिरण और बारहसिंघा की मौतों की खबरें आती रहती है जो सिलसिला लगातार जारी है शासन द्वारा वन्य प्राणियों के खाने-पीने के लिए जंगलों में विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं जहां उनके पानी पीने के लिए तालाबों का निर्माण करोड़ों खर्च कर बनाए गए इसके साथ साथ वन्य प्राणियों के खाने के लिए वन विभाग के माध्यम से विभिन्न उपाय किए गए लेकिन सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं खोदे गए तालाबों में पानी का अभाव वही वन्यजीवों के लिए की गई शासन द्वारा व्यवस्था मे वन विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर रहे हैं यही कारण है कि वन्य प्राणियों को शासन के मनसा अनुरूप सुविधा नहीं मिल पा रही है और भूख प्यास से विचलित वन्य प्राणी गांव की ओर विचरण करते दिखाई देते हैं जिससे लोगों को परेशानियों का सामना उठाना पड़ता है और विभिन्न परिस्थितियों में वन्य प्राणियों की जान चली जाती है,
ताजा मामला पाली रेंज से आया है जहां एक भूखे प्यासे हिरण की सड़क दुर्घटना में मौत हुई है, कोरबा जिले के कोरबा एवं कटघोरा मंडल में बड़े पैमाने पर वन्य प्राणियों का बसेरा है। जिसमें कटघोरा वन मंडल के पाली रेंज में सबसे अधिक बारहसिंघा जैसे वन प्राणी पाए जाते हैं। गर्मी के दिनों में वह पानी की तलाश में रिहायशी क्षेत्र में आते हैं तब इन्हें कुत्ते नोच कर खा जाते हैं या फिर किसी अन्य हादसे के शिकार हो जाते हैं।
घटित घटना के अंतर्गत पाली में स्थित वन विभाग के विश्राम गृह के समीप फोरलेन सड़क मार्ग पर हुई दुर्घटना में अज्ञात वाहन की चपेट में एक चीतल आ गया। जिससे चीतल की इलाज के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार पाली के निकट दमिया जंगल में बड़ी संख्या में हिरण चीतल का अस्थायी रहवास है। इस जंगल से होकर फोरलेन सड़क बनाए जाने के लिए बड़ी मात्रा में सागौन के घने जंगलों की कटाई हुई है जिससे इन बेजुबान जानवरों के रहवास पर बुरा असर पड़ा है। वर्तमान में गर्मी के मौसम ने दस्तक दे दी है और वन क्षेत्र में जल स्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। इसी कारण हिरण, चीतल का समूह रिहायशी इलाकों में पानी और चारे की तलाश में पहुंचने लगे है। ऐसे ही एक चीतल पाली फोरलेन सड़क को पार कर वन मंडल के विश्रामगृह हदखोजा तालाब के निकट पहुंचा था जो कि अज्ञात वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। इसकी पशु चिकित्सा विभाग को सूचना दी गई, लेकिन चीतल की जान नहीं बचाई जा सकी। इससे पूर्व भी कई चीतल जंगल से भटककर रिहायशी क्षेत्र में पहुंच कर कुत्तों का शिकार बन जाते हैं। मृत चीतल का अंतिम संस्कार वन विभाग के रेस्ट हाउस में किया गया।
















