छत्तीसगढ़/कोरबा :- कोरबा कलेक्ट्रेट ईडी की टीम द्वारा माइनिंग विभाग भू अभिलेख शाखा, डीएमएफ शाखा सहित अन्य विभागों में 3 दिन तक चली दस्तावेजों की पड़ताल के बाद शनिवार की रात 12 बजे ईडी की टीम वापस हो गई है गुरुवार को सुबह कलेक्ट्रेट पहुंची ईडी की टीम 3 दिनों तक दस्तावेजों की पड़ताल की और शनिवार लगभग 12 बजे टीम रवाना हो गई टीम अपने साथ विभिन्न दस्तावेज व कंप्यूटर के हार्ड डिक्स साथ ले गई,
बता दें कि ईडी के रडार में मुख्य रूप से माइनिंग विभाग, के साथ डीएमएफ शाखा , भू अभिलेख शाखा के साथ साथ आदिवासी विकास विभाग था, सूत्रों की माने तो जहां माइनिंग विभाग में कोयले से संबंधित एक सिडीकेट के रूप में कार्य कर रहा था जिसका संचालन रायपुर से किया जा रहा था, वही डीएमएफ फंड मे भी भारी भ्रष्टाचार था जहां मनमाने रूप से अनुपयोगहीन जगहों में डीएमएफ फंड खर्च किए गए थे, एनजीओ और ठेकेदारों से अधिकारियों द्वारा सेटिंग कर मनमाना काम दिया गया था जिसमें कमीशन 20 से 25 परसेंट तक बढ़ गया था, डीएमएफ से स्वीकृत हुए पंचायतों के कार्यों में इस अधिक कमीशन खोरी से पंचायत प्रतिनिधि परेशान थे, कुछ दिन पूर्व आदिवासी वरिष्ठ नेता पूर्व गृहमंत्री व रामपुर विधायक ननकीराम कंवर ने भी डीएमएस फंड में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिकायत की थी और डीएमएफ के परियोजना अधिकारी भरोसा राम ठाकुर को निलंबित कर हटाने की बात कही थी, इसके साथ साथ राजस्व विभाग में भी भारी तादात में जमीनों की हेरा फेरी करते हुए रजिस्ट्री की गई, सरकारी जमीनों में रातों-रात पावर प्लांट से निकलने वाली राख को पाटकर किसी के नाम रजिस्ट्री कर दी गई, इस प्रकार से हुए अवैध तरीके से जमीन की रजिस्ट्री में अधिकारी भी मालामाल हुए कई अधिकारियों द्वारा अपने सगे संबंधियों के नाम से जमीनों का खेल खेला, भारत माला प्रोजेक्ट में भी भारी भ्रष्टाचार हुआ, जहां सरकारी जमीनों की रातों-रात रजिस्ट्री कर अपने लोगों को फायदा पहुंचाया गया, इसके साथ साथ आदिवासी विकास विभाग भी टीम के रडार पर रहा जहां आदिवासियों के उद्धार और उत्थान के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से भारी फंड दिया जाता है लेकिन धरातल में उसका कितना इस्तेमाल होता है इसका प्रमाण तौर पर सुर्खियां न्यूज़ ने कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में एक मामले को उजागर किया था जहां लेमरू क्षेत्र के आश्रित गांव सरई बहरा और भुरु माटी के राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा की हालत पर प्रकाश डाला था सरई बहरा मे जहां 14 वर्षों से दो बच्चियां दिमागी बुखार के कारण अस्वस्थ जमीन पर लेटी थी उन्हें स्वास्थ्य सुविधा नसीब नहीं हो पा रही थी हालांकि बाद में खबर प्रकाश में लाने के बाद अधिकारियों द्वारा इनकी सुध ली गई और उनका इलाज लगभग 1 माह तक जिला अस्पताल में चला इसके बाद पुनः उन्हें फिर उनके गांव उन्हें तड़पने के लिए भेज दिया गया जबकी जरूरत थी उन्हें अन्य जगह पर विशेष इलाज की, कलेक्टर रानू साहू ने भी कहा था जरूरत पड़ी तो इन्हें बाहर इलाज के लिए भेजा जाएगा लेकिन सब हवा-हवाई रहा, इसके साथ साथ इस गांव में ना सड़क है ना पुल है लोग बड़ी मुश्किल से नदी पार कर गांव तक पहुंचते हैं कहा जाए तो सरकारी योजनाएं यहां तक नहीं पहुंच पा रही हैं कुछ यही हाल भुरु माटी गांव का रहा जहां विकास कोसों दूर है, फिलहाल ईडी की टीम विभिन्न दस्तावेजों को लेकर लौट गई है अब इसमें क्या-क्या गड़बड़ियां पाई जाती है और वह मीडिया तक पहुंचती है या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा ।
कोरबा कलेक्ट्रेट से ईडी की टीम चुपचाप हुई रवाना, कंप्यूटर हार्ड डिस्क समेत कई दस्तावेज ले जाने की सूचना













