HomeBreaking NewsSECL कुसमुंडा प्रबंधन के खिलाफ भूविस्थापितों का फूटा आक्रोश

SECL कुसमुंडा प्रबंधन के खिलाफ भूविस्थापितों का फूटा आक्रोश

रोजगार, मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव, शवयात्रा निकालकर फूंका पुतला

छत्तीसगढ़/कोरबा :- एसईसीएल कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित भूविस्थापितों का आक्रोश बुधवार को फूट पड़ा। लंबे समय से रोजगार, पुनर्वास और मुआवजा जैसी मांगों की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन की शवयात्रा निकालकर विरोध जताया और सुभाष चौक पर पुतला दहन किया। इसके बाद पदयात्रा कर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर सड़क पर बैठकर जोरदार नारेबाजी की।

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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि चंद्र नगर और जटराज क्षेत्र के किसानों की भूमि वर्षों पूर्व अधिग्रहित की गई थी। सन् 1978-79, 1984 और 2009-10 में चार बार में अधिग्रहण की प्रक्रिया हुई, लेकिन आज तक अनेक पात्र खातेदारों को रोजगार नहीं मिला। पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश शासन के आदेश के बावजूद रोजगार, बसाहट और मुआवजे की प्रक्रिया अधूरी है।

पुनर्वास स्थल का निर्माण अधूरा, खदान गांव में घुस चुकी
ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास स्थल अब तक तैयार नहीं किया गया है, जबकि खदान विस्तार के कारण गांव की सीमा में प्रवेश कर चुकी है। जल संकट, प्रदूषण और हैवी ब्लास्टिंग की समस्याओं से ग्रामीण परेशान हैं। 2014-15 से लगातार बसाहट की मांग की जा रही है, लेकिन एसईसीएल प्रबंधन उदासीन बना हुआ है।

सर्वे पर जताया विरोध, ठेका मजदूरों पर दबाव का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि बिना उचित पुनर्वास के मकानों का सर्वे कराया जा रहा है। ठेका कंपनी द्वारा सर्वे के लिए मजदूरों पर दबाव डाला गया और विरोध करने पर काम से निकालने की धमकी दी गई। कई ग्रामीणों से जबरन सर्वे भी कराया गया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जब तक पुनर्वास स्थल पर सभी मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जातीं, सर्वे पर तत्काल रोक लगाई जाए।

पुलिस के साथ झूमाझटकी, पुतला दहन को बुझाने का प्रयास
सुभाष चौक पर पुतला दहन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झूमाझटकी भी हुई। पुलिस जवान आग बुझाने पानी डाल रहे थे, इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच हल्की गहमागहमी हुई। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

भविष्य में और बड़ा आंदोलन
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो आगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष अब हक और अधिकार की लड़ाई है, जिसे वे हर हाल में लड़ेंगे।

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